लोकसभा में सरकार का खुलासा: पीएलआई नीतियों से विनिर्माण को मिली नई गति, ₹15 लाख करोड़ पार पहुंचा निर्यात

वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार को निचले सदन (लोकसभा) में एक लिखित जवाब के माध्यम से केंद्र सरकार की पीएलआई (उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन) योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार, इन योजनाओं के तहत ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष निवेश धरातल पर उतरा है। इस वृहद आर्थिक गतिविधि से देश में 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन संभव हो सका है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 14 प्रमुख क्षेत्रों के लिए कुल ₹1.91 लाख करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ यह प्रोत्साहन योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इसका प्राथमिक लक्ष्य भारत को विनिर्माण, निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का बड़ा केंद्र बनाना है। इस पूरी व्यवस्था के प्रभावी समन्वय का जिम्मा डीपीआईआईटी संभाल रहा है, जबकि विषयगत मंत्रालय अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों का निष्पादन देख रहे हैं। योजनाओं के लागू होने के बाद से अब तक ₹15.2 लाख करोड़ से अधिक के उत्पादों का निर्यात किया जा चुका है।
निर्यात आंकड़ों का रुझान दर्शाता है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में पैठ मजबूत हुई है। संचयी निर्यात मार्च 2024 के ₹4 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च 2025 में ₹6.5 लाख करोड़ और मार्च 2026 तक ₹15.2 लाख करोड़ के स्तर को छू गया। विशेष रूप से मोबाइल निर्माण के मामले में देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है, जहां उत्पादन में 2.4 गुना की वृद्धि हुई है और आयात में 77 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई है। आज देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल हैंडसेट भारत में ही बन रहे हैं।
स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्र में पीएलआई योजना के आंकड़े उल्लेखनीय हैं, जहां कुल संचयी बिक्री ₹3.64 लाख करोड़ से अधिक रही है। देश में 1,931 फार्मा उत्पादों का निर्माण शुरू हुआ, जिनमें से 191 बल्क ड्रग्स का उत्पादन पहली बार भारतीय भूमि पर हो रहा है। 26 अति-महत्वपूर्ण एपीआई के लिए 55,000 मीट्रिक टन की उत्पादन क्षमता विकसित की गई है, जिससे लेवोफ्लोक्सासिन, पैरासिटामोल जैसी जीवनरक्षक दवाओं के लिए विदेशी निर्भरता कम हुई है। इसके साथ ही, सीटी स्कैनर और अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी 55 अत्याधुनिक मेडिकल तकनीकों का निर्माण 22 देशी इकाइयों द्वारा किया जा रहा है।
संसद को यह भी बताया गया कि दूरसंचार क्षेत्र में 4जी और 5जी तकनीकों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिला है। व्हाइट गुड्स सेगमेंट में एयर कंडीशनर के मुख्य घटकों जैसे कंप्रेसर का घरेलू उत्पादन 2021 के 10 लाख से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 1 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया है। ऑटोमोबाइल, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल, सोलर मॉड्यूल, ड्रोन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे अन्य सूचीबद्ध क्षेत्रों में भी सकारात्मक औद्योगिक वृद्धि देखी गई है।
योजनाओं के सुचारू संचालन हेतु कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में गठित सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह (EGoS) नियमित अंतराल पर इनका मूल्यांकन करता है। सरकार ने उद्योगों की प्रतिक्रिया और जमीनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देशों को सरल बनाने, शर्तों में ढील देने और अनुश्रवण प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के प्रयास किए हैं, ताकि देश का औद्योगिक ढांचा अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।



