एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026: ऑस्ट्रेलिया में भारतीय वायु सैनिकों ने की पीएम अल्बनीज से भेंट, राफेल विमान दिखाएंगे ताकत

डार्विन में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ के शुभारंभ अवसर पर भारतीय वायु सेना की टुकड़ी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से शिष्टाचार मुलाकात की। हर दो साल में आयोजित होने वाले इस वैश्विक अभ्यास में 19 देशों की वायु सेनाएं शामिल हुई हैं, ताकि आपसी परिचालन सहयोग और वायु रणनीतियों को और अधिक मजबूती दी जा सके।
कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश में कहा कि थल से लेकर नभ तक भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उच्चायोग ने पुष्टि की कि डार्विन में ओपनिंग सेरेमनी के दौरान भारतीय दल को प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।
इस अभ्यास में भारतीय वायु सेना के लगभग 100 सैन्यकर्मी और 4 राफेल लड़ाकू विमान भाग ले रहे हैं। दक्षिणी गोलार्ध के इस विशालतम हवाई युद्ध अभ्यास में 20 अन्य देशों के प्रतिनिधि भी अपनी सामरिक दक्षता का प्रदर्शन और संवर्धन कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय वायु सेना का दल 17 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया पहुँचा था। आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह भागीदारी भाग लेने वाली सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन क्षमता और पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान को गति प्रदान करेगी।
रक्षा मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 20 जुलाई से 07 अगस्त 2026 तक चलने वाला यह अभ्यास RAAF का सबसे प्रमुख द्विवार्षिक आयोजन है। उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विरलाबादी वाले विस्तृत इलाकों में रात्रि उड़ानों के अभ्यास की प्रमुखता के कारण इसे ‘पिच ब्लैक’ नाम दिया गया है।
अपने 45 साल के इतिहास में पहली बार यह अभ्यास इतने व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, जहाँ विशाल सैन्य बल एक साथ मिलकर जटिल हवाई अभियानों का निष्पादन करेंगे।
भारतीय बेड़े में उच्च प्रशिक्षित पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर शामिल हैं। मुख्य लड़ाकू भूमिका में राफेल विमान तैनात रहेंगे, जबकि लॉजिस्टिक्स और ईंधन आपूर्ति के लिए C-17 ग्लोबमास्टर-III और Il-78 रीफ्यूलिंग विमान सहयोग प्रदान करेंगे।
यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बहुराष्ट्रीय माहौल में काम करने का अवसर देता है। उल्लेखनीय है कि भारत ने इससे पहले 2018, 2022 और 2024 के संस्करणों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और रक्षा साझेदारी के प्रति भारत के निरंतर समर्पण को दर्शाती है।



