द्विपक्षीय संबंधों की बहाली के लिए सीमा पर शांति प्राथमिक शर्त, वांग यी से वार्ता में बोले डॉ. जयशंकर

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बुधवार को मनीला में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन के इतर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संतुलित व निष्पक्ष व्यापारिक अवसरों की वकालत की। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक में उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पड़ोसी देशों को अपने मतभेदों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से करना चाहिए, ताकि सीमा या व्यापार से जुड़ा कोई भी मुद्दा गंभीर विवाद का रूप न ले सके।
वार्ता के दौरान कज़ान में अक्टूबर 2024 में हुई शीर्ष नेताओं की ऐतिहासिक बैठक का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि उस मुलाकात के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में प्रगति देखी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि अगस्त में तियानजिन में हुई आगामी चर्चाओं ने इस द्विपक्षीय सुधार प्रक्रिया को और गति दी है। डॉ. जयशंकर के अनुसार, एक मजबूत और सहयोगात्मक संबंध केवल आपसी संवेदनशीलता, साझा हितों और सम्मान के आधार पर ही निर्मित हो सकता है, जो एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए अपरिहार्य है।
भारत का रुख स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और सीमावर्ती इलाकों में पूर्ण शांति तथा स्थिरता कायम होना संबंधों के सामान्यीकरण के लिए सबसे पहली शर्त है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों ही देश इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस स्थिति को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने सीमा सुरक्षा एवं शांति से संबंधित सभी स्थापित तंत्रों को मजबूत करने का आह्वान किया।
दोनों एशियाई शक्तियों के व्यापक हितों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि हमारे नेताओं के बीच यह स्पष्ट सहमति थी कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। इस संतुलन को बनाए रखना कूटनीति की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने दोनों देशों द्वारा संबंधों को पटरी पर लाने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों का स्वागत किया, जिसमें सीधी उड़ानें शुरू करना, वीजा नियमों में ढील देना, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से चालू करना और सीमा व्यापार को पुनर्जीवित करना शामिल है।
व्यापारिक पहलुओं पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार संतुलन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों को दूर करना अभी भी प्रमुख चिंता के विषय हैं जिन पर ध्यान देना बाकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को संस्थागत बैठकों को सुचारू बनाने के साथ-साथ आम जनता और अधिकारियों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होगा।
अपने वक्तव्य के अंतिम भाग में विदेश मंत्री ने ब्रिक्स में भारत की अध्यक्षता के दौरान चीनी पक्ष द्वारा दिए गए सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने मौजूदा अनिश्चित वैश्विक माहौल का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर संवाद बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।



