ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विविधता, सतत विकास और नवाचार को बताया संगठन की मूल शक्ति

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन, रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, आपसी सहयोग और स्थिरता पर विशेष जोर देते हुए सदस्य देशों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समूह की वास्तविक ताकत इसके देशों की विविधता और परस्पर तालमेल में मौजूद है। अपने संबोधन में उन्होंने इस विचार को रेखांकित किया कि विविधता सदस्य देशों की पहचान बने, आपसी सहयोग प्रेरणा का स्रोत बने और सामूहिक प्रगति का लाभ पूरी मानवता के कल्याण के लिए सुनिश्चित हो।
प्रधानमंत्री ने सदस्य देशों के बीच अब तक हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि रोजगार क्षमता में वृद्धि, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण को गति दी गई है। छोटे उद्योगों को तकनीकी ज्ञान, वित्तीय सहायता और नए बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से ब्रिक्स एमएसएमई कॉर्पोरेशन पोर्टल की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही, शहरों के बीच बेहतरीन कार्यप्रणालियों और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ स्थापित किया गया है।
पर्यावरण और प्रगति के समन्वय पर विचार रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को सदैव माता का स्वरूप माना गया है। भारत की यह दीर्घकालिक मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स मंच पर भी मानवीय प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो सतत विकास की बुनियादी नींव और आने वाली पीढ़ियों के प्रति साझा दायित्व है।
स्वच्छ ऊर्जा और कृषि क्षेत्र की पहलों का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार किया गया है। यह व्यवस्था स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को अधिक भरोसेमंद, कुशल और सुलभ बनाने में योगदान देगी। इसके अतिरिक्त, एग्रो-इकोलॉजी और पुनर्योजी कृषि से जुड़े उत्कृष्ट संस्थान पारंपरिक समझ को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ेंगे, जबकि समुदाय आधारित जलवायु अनुकूलन के सिद्धांत स्थानीय ज्ञान को पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बनाएंगे।
ग्लोबल साउथ के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि इन मूलभूत स्तंभों पर काम करते हुए ब्रिक्स ने समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाया है। उनका मानना है कि ब्रिक्स के स्तर पर तैयार समाधान केवल सदस्य देशों तक सीमित न रहकर ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुसार अनुकूलनीय और उपलब्ध होने चाहिए।
अपने अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के राष्ट्रों का ब्रिक्स पर भरोसा निरंतर सुदृढ़ हुआ है। इसका कारण यह है कि यहां उनकी बात को तवज्जो दी जाती है, उनके अनुभवों का आदर होता है और समाधान केवल उनके लिए तैयार करने के बजाय उनके साथ मिलकर विकसित किए जाते हैं। उन्होंने पुनः दोहराया कि विविधता और सहयोग ही इस समूह का सबसे बड़ा सामर्थ्य है।



