भारतीय अंतरिक्ष अभियानों को मिली नई रफ्तार, राज्यसभा में सरकार ने प्रस्तुत की तीन वर्षों की उपलब्धियां

केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को उच्च सदन (राज्यसभा) में आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जुलाई 2023 से जून 2026 के दौरान भारत ने 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा। इनमें 11 राष्ट्रीय और 9 अंतरराष्ट्रीय उपग्रह शामिल हैं, जिन्हें कुल 12 रॉकेट अभियानों के जरिए सफलता से अपनी-अपनी कक्षाओं में स्थापित किया गया। यह विवरण सदन में पेश किए गए एक लिखित उत्तर के माध्यम से सामने आया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में हासिल की गई महत्वपूर्ण सफलताओं का ब्योरा देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। साथ ही, सौर गतिविधियों के अध्ययन के लिए ‘आदित्य-L1’ वेधशाला को अंतरिक्ष में भेजा गया। भारत ने अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग की जटिल प्रक्रिया का सफल परीक्षण करने वाले चौथे देश का दर्जा भी SPADEX मिशन के माध्यम से प्राप्त किया। इसी समय अंतराल में श्रीहरिकोटा केंद्र से 100वें प्रक्षेपण का ऐतिहासिक पड़ाव भी पूरा किया गया।
तकनीकी प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि भारी उपग्रहों को लॉन्च करने के क्रम में LVM3 रॉकेट का उपयोग कर CMS-03 मिशन को पूरा किया गया। इसके तहत देश की धरती से प्रक्षेपित अब तक के सबसे भारी उपग्रह को जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित किया गया। वर्तमान समय में इसरो पृथ्वी अवलोकन, संचार, नेविगेशन और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए चार मुख्य रॉकेट प्रणालियों (PSLV, GSLV, LVM3 और SSLV) का संचालन कर रहा है।
अंतरिक्ष क्षमता को और मजबूत करने के लिए ढांचागत सुधार किए जा रहे हैं। श्रीहरिकोटा में एक नए (तीसरे) लॉन्च पैड के निर्माण की अनुमति दी गई है, जो भविष्य के नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के अभियानों में काम आएगा। वहीं, छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण और निजी कंपनियों की गतिविधियों को गति देने के लिए तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में देश का दूसरा रॉकेट लॉन्च कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है।
सरकार की नीतियों के कारण इस क्षेत्र में निजी संस्थाओं और एमएसएमई की भागीदारी बढ़ी है। IN-SPACe द्वारा शुरू किए गए प्रोत्साहनों का लक्ष्य 2033 तक देश के स्पेस सेक्टर को 44 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। आंकड़ों के अनुसार, इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने 2024-25 में प्रक्षेपण सेवाओं के जरिए 447.43 करोड़ रुपये की कमाई की, जो कि वर्ष 2023-24 में अर्जित 218.21 करोड़ रुपये की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्शाती है।



