देश में 10,389 किमी लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर मंजूर, संसद में सरकार ने जारी किए आंकड़े

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने संसद को सूचित किया है कि देश में अब तक 10,389 किलोमीटर लंबी नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। राज्यसभा में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस स्वीकृत नेटवर्क में से 4,809 किलोमीटर का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है, जबकि शेष 5,580 किलोमीटर खंड पर निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उच्च सदन में एक लिखित उत्तर के माध्यम से स्पष्ट किया कि सभी निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन हेतु त्रिस्तरीय समीक्षा तंत्र स्थापित किया गया है। इसमें परियोजना, राज्य और केंद्रीय स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें संबंधित राज्य सरकारों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी शामिल है।
राज्यवार स्थिति की समीक्षा करने पर राजस्थान इस नेटवर्क के मामले में शीर्ष स्थान पर है, जहाँ सबसे अधिक 1,340 किलोमीटर की परियोजनाएं आवंटित की गई हैं। राज्य में अब तक 1,192 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 148 किलोमीटर का कार्य प्रगति पर है। पंजाब में स्वीकृत 923 किलोमीटर में से 774 किलोमीटर पर वर्तमान में कार्य जारी है।
अन्य प्रमुख राज्यों के आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश को आवंटित 893 किलोमीटर में से 308 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है और 585 किलोमीटर पर काम जारी है। उत्तर प्रदेश में स्वीकृत 884 किलोमीटर में से 388 किलोमीटर का निर्माण पूर्ण हो चुका है और 496 किलोमीटर पर कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त, हरियाणा को आवंटित 839 किलोमीटर में से 615 किलोमीटर तथा गुजरात के 764 किलोमीटर नेटवर्क में से 605 किलोमीटर का निर्माण संपन्न किया जा चुका है।
परियोजनाओं की गति बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक सुधार लागू किए गए हैं। भूमि अधिग्रहण को सुगम बनाने के लिए ‘भूमि राशि’ पोर्टल और जीआईएस-आधारित प्रणाली को अपनाया गया है। वहीं पर्यावरण और वन संबंधी स्वीकृतियों में लगने वाले समय को कम करने के लिए ‘परिवेश’ पोर्टल को उन्नत किया गया है।
इसके अलावा, रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और अंडर ब्रिज (RUB) के जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (GAD) की स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से सरल बनाया गया है। केंद्रीय मंत्रालय और राज्य एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय और समीक्षा बैठकों के माध्यम से जमीनी स्तर की बाधाओं को दूर किया जा रहा है, जिससे देशभर में राजमार्ग निर्माण में तेजी दर्ज की गई है।



