राष्ट्रमंडल खेल 2026: भारत को पहला गोल्ड दिलाने वाली मीराबाई चानू का बयान- ‘रिकॉर्ड नहीं, खेल में सुधार और देश के लिए मेडल लाना थी प्राथमिकता’

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का खाता स्वर्ण पदक से खोलते हुए दिग्गज भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने अपनी इस सफलता पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और भारत के लिए प्रतियोगिता का पहला गोल्ड मेडल जीता।
महिलाओं की 48 किग्रा भारोत्तोलन श्रेणी में भाग लेते हुए मीराबाई ने स्नैच स्पर्धा में 85 किग्रा वजन उठाकर नया कीर्तिमान कायम किया। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत वे भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने में सफल रहीं।
जीत दर्ज करने के बाद मीराबाई ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात होती है। बड़ी प्रतियोगिताओं में मानसिक दबाव होना स्वाभाविक है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात उस दबाव से निपटकर बेहतर परिणाम हासिल करना होता है। वे भारोत्तोलन में देश का नाम रोशन करने के इरादे से मैदान में उतरी थीं।
उन्होंने अपनी रणनीति के बारे में बात करते हुए कहा कि वे रिकॉर्ड बनाने का दबाव लेकर नहीं खेल रही थीं। यह वर्ग आगे इन खेलों में शामिल नहीं रहेगा, इसलिए उनका प्राथमिक उद्देश्य एशियाई खेलों से पहले अपने प्रदर्शन का सही आकलन करना था ताकि कमियों को दूर किया जा सके।
उन्होंने यह भी साझा किया कि वे अपने कोच के दिशा-निर्देशों का पालन कर रही थीं। उन्होंने वही किया जो उनके कोच ने उन्हें करने के लिए कहा था। बिना किसी पूर्व योजना के नया रिकॉर्ड स्थापित हो जाना किसी भी एथलीट के लिए गर्व का विषय होता है।
अपनी कड़ी मेहनत और पोडियम तक के सफर का जिक्र करते हुए मीराबाई ने बताया कि इस सफलता के पीछे कई चुनौतियां और चोटों का दर्द छिपा था। जब पदक तालिका में शीर्ष पर खड़े होकर राष्ट्रगान गूंजता है, तो अतीत के सारे संघर्ष याद आ जाते हैं। उस पल आंखों से निकले आंसू उस अपार खुशी का प्रमाण थे।
इस स्वर्णिम उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई चानू की सराहना की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मीराबाई ने लगातार दूसरे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है और देश का मान बढ़ाया है।



