सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावे को भारत ने नकारा, पीओजेके चुनावों को बताया अवैध कब्जे को वैध ठहराने का प्रयास

भारत ने सिंधु घाटी सभ्यता को लेकर पाकिस्तान की ओर से किए गए दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो देश लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देता रहा है, वह किसी भी साझा या बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर विश्वसनीय दावा नहीं कर सकता। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में कराए जा रहे विधानसभा चुनावों को केवल दिखावटी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध ठहराने का प्रयास है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यह प्रतिक्रिया दी।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनकी सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। ऐसे में बहुलतावादी सांस्कृतिक विरासत पर पाकिस्तान का दावा विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ऐसे दावे केवल दिखावा हैं। भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के लोगों की पहचान सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारों से जुड़ी हुई है।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कराए जा रहे विधानसभा चुनावों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। रणधीर जायसवाल ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पीओजेके में कराए जा रहे कथित चुनावों का उद्देश्य केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध दिखाना और वहां हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि पीओजेके में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों, प्रशासनिक दमन और स्थानीय लोगों को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखने का परिणाम हैं। उनके अनुसार क्षेत्र में जारी प्रदर्शन वहां के लोगों के बढ़ते असंतोष को दर्शाते हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पीओजेके में चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसक झड़पें, चुनावी अनियमितताओं के आरोप और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौत की घटनाओं के कारण माहौल तनावपूर्ण बना रहा। वहीं, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के विरोध मार्च के दौरान कई लोगों की मौत और अनेक लोगों के घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करते हुए दिखाया गया है।



