कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जूडो में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, अस्मिता और हर्ष ने जीता स्वर्ण, यामिनी को मिला रजत

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शुक्रवार को भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। महिलाओं के 57 किग्रा भार वर्ग में भारत की यामिनी मौर्य ने रजत पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक के हाथों पराजित होने के बावजूद, यामिनी के इस पदक के साथ भारत ने जूडो में उस दिन का अपना तीसरा पदक हासिल कर लिया।
महिलाओं के 57 किग्रा श्रेणी के खिताबी मुकाबले में यामिनी मौर्य का मुकाबला इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक से हुआ। इस कड़े और कसमकश भरे मैच में यामिनी जीत दर्ज करने में सफल नहीं हो सकीं और उन्हें उपविजेता रहकर रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।
यामिनी की इस सफलता से पूर्व भारतीय जूडो दल ने दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर नया कीर्तिमान रचा। अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में शीर्ष स्थान प्राप्त कर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत को जूडो का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इसके तुरंत बाद, हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा भार वर्ग में बाजी मारकर इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बनने का गौरव प्राप्त किया।
अस्मिता डे का स्वर्ण पदक मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी हेइडी क्वैच को 2-1 के अंतर से पराजित किया। पूरे मैच के दौरान अस्मिता ने असाधारण संयम बनाए रखा और अपनी सटीक रणनीति व सुदृढ़ रक्षात्मक शैली के बल पर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की।
पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग के अंतिम मुकाबले में 23 वर्षीय हर्ष सिंह का सामना ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज से हुआ। मैच की शुरुआत में हर्ष को कड़ी चुनौती मिली, लेकिन समय समाप्त होने से ठीक 41 सेकंड पहले उन्होंने वाजा-अरी का महत्वपूर्ण अंक अर्जित कर लिया। इसके बाद उन्होंने अपने मजबूत बचाव के सहारे बढ़त को अंत तक कायम रखा और एक यादगार जीत दर्ज की।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में अस्मिता डे और हर्ष सिंह द्वारा जीते गए दो स्वर्ण तथा यामिनी मौर्य के रजत पदक ने जूडो में भारत के उत्कृष्ट प्रदर्शन को रेखांकित किया है। ये तीनों पदक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस खेल में भारत के निरंतर बढ़ते प्रभाव और प्रभुत्व का स्पष्ट संकेत हैं।



