माइनस 42 डिग्री में भी नहीं जमेगा ईंधन: भारतीय सेना और BPCL ने विकसित किया खास ‘एक्सट्रीम वेदर ग्रेड’ डीजल

भारतीय सेना और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने संयुक्त रूप से एक विशेष ‘एक्सट्रीम वेदर ग्रेड’ (XWG) डीजल तैयार किया है, जो माइनस 42 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान में भी द्रव अवस्था में बना रहेगा। थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से इस नए ईंधन की आपूर्ति को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह तकनीकी विकास लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे अत्यधिक ठंडे तथा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात सैन्य वाहनों के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करेगा।

अत्यधिक ऊंचाई और भीषण ठंड वाले सीमावर्ती इलाकों में सामान्य डीजल में मौजूद पैराफिन वैक्स जमने लगता है, जिससे वाहनों के ईंधन फिल्टर अवरुद्ध हो जाते थे। इस समस्या से निपटने के लिए बख्तरबंद वाहनों, टैंकों और अन्य गाड़ियों के इंजन को पूरी रात थोड़े-थोड़े अंतराल पर चालू रखना पड़ता था। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने इस स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि चालकों को रात भर जागकर गाड़ियाँ चालू-बंद करनी पड़ती थीं, जिससे उन पर अत्यधिक शारीरिक और मानसिक तनाव पड़ता था।

आर्मर्ड कोर पृष्ठभूमि के जनरल सेठ ने अपने सैन्य जीवन के शुरुआती अनुभवों को साझा करते हुए ईंधन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया ईंधन सेना के ‘ए’ वर्ग के भारी बख्तरबंद वाहनों तथा ‘बी’ वर्ग के हल्के सैन्य वाहनों और ट्रकों दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। उनके अनुसार, यह न केवल वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा, बल्कि शून्य से नीचे के तापमान में तैनात सैनिकों के मनोबल को भी मजबूत करेगा।

इस ईंधन की विकास प्रक्रिया को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि सेना द्वारा अपनी आवश्यकता प्रस्तुत किए जाने के बाद बीपीसीएल के साथ मिलकर महज एक वर्ष के भीतर यह समाधान निकाल लिया गया। तकनीकी दृष्टिकोण से इस डीजल का पोर पॉइंट माइनस 42 डिग्री सेल्सियस है, जबकि इसका फ्लैश पॉइंट लगभग 50 डिग्री सेल्सियस रखा गया है। यह विशेषता इसे भीषण ठंड में जमने से बचाती है और सामान्य परिवहन या भंडारण के समय सुरक्षा भी प्रदान करती है।

सैन्य रणनीति के संदर्भ में गतिशीलता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए जनरल सेठ ने रेखांकित किया कि किसी भी सेना की त्वरित लामबंदी ही युद्धक्षेत्र में उसकी सफलता की कुंजी होती है। यदि वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो सामरिक संचालन कठिन हो जाता है। यह अत्याधुनिक ईंधन भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तेज और बिना किसी रुकावट के परिचालन क्षमता प्रदान करने में सक्षम बनाएगा।

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