असम में 1.68 लाख आबादी बाढ़ से बेहाल, गोलाघाट में धनसिरी नदी खतरे के निशान के पार

शुक्रवार को असम में बाढ़ से स्थिति गंभीर बनी रही, जहां गोलाघाट जिले के माध्यम से गुजरने वाली धनसिरी (दक्षिण) नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों (एएसडीएमए) ने जनहित में एडवायजरी जारी कर स्थानीय निवासियों को अत्यधिक सावधानी बरतने और स्थिति सुधरने तक जलस्रोतों से दूर रहने की हिदायत दी है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब राज्य के 15 अलग-अलग जिलों में 1.68 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।

एएसडीएमए की हालिया रिपोर्ट दर्शाती है कि 39 राजस्व मंडलों में स्थित 481 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे 1,68,701 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त 14,382 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे अनेक जिलों में कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

आपदा का सबसे भारी असर गोलाघाट जिले पर पड़ा है, जहां प्रभावितों की संख्या 54,085 दर्ज की गई है। इसके अलावा शिवसागर के 49,515, जोरहाट के 27,842 और चराइदेव के 21,486 नागरिक इस प्राकृतिक विभीषिका को झेल रहे हैं। शिवसागर, जोरहाट, लखीमपुर और चराइदेव जिलों के कृषि क्षेत्रों को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है।

जल निकाय संबंधी विवरण देते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सूचित किया कि धनसिरी (दक्षिण) नदी नुमालीगढ़ में खतरे के बिंदु को पार कर चुकी है, यद्यपि किसी भी स्थान पर नदी का जलस्तर अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर नहीं पहुंचा है। राज्य प्रशासन की ओर से आपदाग्रस्त इलाकों में 133 राहत शिविर एवं सहायता वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन आश्रय स्थलों में 10,111 बेघर लोग रह रहे हैं, जबकि 35,596 अन्य प्रभावितों को वितरण केंद्रों के जरिए सहायता दी जा रही है। राहत टीमों द्वारा चावल, दाल, खाद्य तेल, चारा और बुनियादी वस्तुएं बांटी जा रही हैं।

बाढ़ जनित घटनाओं में अब तक गोलाघाट और उदलगुरी जिलों में एक-एक व्यक्ति सहित कुल दो मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि किसी भी नागरिक के गुमशुदा होने की खबर नहीं है। इस आपदा में 41,475 पशु प्रभावित हुए हैं और 365 मकानों को क्षति पहुंची है, जिनमें 40 संरचनाएं पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। सरकारी तंत्र द्वारा राहत और पुनर्वास प्रक्रिया तेजी से चलाई जा रही है तथा जोखिम वाले इलाकों में बचाव दल नौकाओं के साथ तैनात हैं।

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