अग्नि-4 का सफल परीक्षण: भारत ने सामरिक प्रतिरोधक क्षमता और सैन्य तैयारियों को दी नई मजबूती

भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करते हुए गुरुवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-4’ का सफल परीक्षण किया गया। सामरिक बल कमान के नेतृत्व में संपन्न हुए इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के सभी प्रचालन और तकनीकी मानदंडों का पूरी तरह से सत्यापन किया गया।
इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने तय उड़ान पथ का सुचारू रूप से अनुसरण करते हुए अपने सभी लक्ष्यों को प्राप्त किया। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित अग्नि-4 देश की सुरक्षा संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित आवधिक परीक्षणों से मिसाइल प्रणालियों की परिचालन तत्परता और कार्यक्षमता की निरंतर समीक्षा संभव होती है।
उल्लेखनीय है कि देश की मिसाइल विकास योजनाओं के तहत 22 मई को कम दूरी की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-1’ का भी सफल परीक्षण किया गया था। सामरिक बल कमान की देखरेख में चांदीपुर परीक्षण रेंज से ही संचालित इस अभ्यास ने मिसाइल के निर्धारित लक्ष्यों और मारक क्षमता को सफलतापूर्वक साबित किया था।
इसी क्रम में, जुलाई में डीआरडीओ द्वारा विकसित लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली ‘कुश’ मिसाइल प्रणाली का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया था। ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से परीक्षित यह प्रणाली दूरगामी हवाई खतरों को नाकाम करने के लिए तैयार की गई है, जिससे देश की लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली को नई ताकत मिली है।



