भारत और सिंगापुर ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की; विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश सचिव मिस्री से मिले ल्यूक गोह

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को नई दिल्ली में सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के स्थायी सचिव (नीति) ल्यूक गोह से पृथक मुलाकाते कीं। इन बैठकों के दौरान दोनों देशों के मध्य घनिष्ठ संबंधों को और अधिक सशक्त करने तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय परिदृश्य के प्रमुख मुद्दों पर भी अपनी राय साझा की।

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के माध्यम से यह जानकारी साझा की कि ल्यूक गोह के साथ हुई वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बात हुई। उन्होंने बताया कि इस बैठक में मुख्य रूप से विनिर्माण, उन्नत तकनीक, खाद्य सुरक्षा तथा ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उधर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी गुरुवार को नई दिल्ली में सिंगापुर के स्थायी सचिव ल्यूक गोह के साथ बैठक की। इस संवाद में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत और सिंगापुर की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाने के रणनीतिक विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के दौरान विदेश सचिव मिस्री और गोह ने वर्तमान वैश्विक तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्तमान समय की साझा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर दोनों देशों के बीच निरंतर निकट समन्वय और संवाद बने रहना अनिवार्य है।

बातचीत के दौरान भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत तय किए गए आठ प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हुई प्रगति का विस्तृत ब्योरा लिया गया। इन सभी क्षेत्रों को आगे भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) की व्यवस्था के तहत क्रियान्वित और आगे विस्तारित किया जाएगा।

इस उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय तालमेल को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया। दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक मामलों से निपटने के लिए आसियान (ASEAN) सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग और परामर्श की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को पदोन्नत करके ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का रूप दिया गया था। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद से ही दोनों राष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में अपने आर्थिक व कूटनीतिक संबंधों को संस्थागत ढांचा प्रदान कर रहे हैं।

इसके पश्चात, सितंबर 2025 में सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की भारत यात्रा के दौरान इस साझेदारी का विस्तृत रोडमैप जारी किया गया था। इस रोडमैप में आर्थिक सहयोग, कौशल विकास, डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा, जन-सांख्यिकी व सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को प्रमुख स्तंभ माना गया है।

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