2047 के विकसित भारत का आधार मजबूत आंतरिक सुरक्षा, भविष्य की चुनौतियों को पहले ही भांपना जरूरी: अमित शाह

नई दिल्ली में मंगलवार को आसूचना ब्यूरो (आईबी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की पहली शर्त देश की मजबूत आंतरिक सुरक्षा है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक पटल पर भारत को अग्रणी बनाने के लिए आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ करना होगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष तथा वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों से अगले 15 से 20 वर्षों के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों व रुझानों का पूर्व-आकलन करने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में उभरने वाली संभावित चुनौतियों की पहचान कर उन्हें रोकने की ठोस रणनीति पहले ही तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों का दायित्व केवल मौजूदा संकटों से निपटना नहीं, बल्कि आने वाले खतरों को पनपने से पहले ही समाप्त करना है। पूर्ववर्ती नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पूर्व की सरकारों ने नक्सलवाद, पूर्वोत्तर और नारकोटिक्स जैसी समस्याओं को समय रहते भांप लिया होता, तो देश को दशकों तक इनकी त्रासदी नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंतरिक सुरक्षा के इन तीनों प्रमुख हॉटस्पॉट से चुनौतियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिसका श्रेय राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और सीएपीएफ के साझा प्रयासों को जाता है।
आपराधिक न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई तीन नई न्याय संहिताओं को अगले एक वर्ष में शत-प्रतिशत लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे तीन साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमों का निपटारा और अदालतों में दोष सिद्धि की दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के व्यापक नेटवर्क और फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी से हर साल 37,000 प्रशिक्षित युवा स्नातक बनकर निकल रहे हैं। उन्होंने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर एक ही रात में की गई कड़ी कार्रवाई, प्रतिबंध और उसके कैडर के ध्वस्तीकरण को केंद्र एवं राज्यों के बीच सटीक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
आतंकवाद के संपूर्ण खात्मे के लिए अमित शाह ने ‘प्रहार’ रणनीति को दस्तावेजों से निकालकर रोजमर्रा की पुलिस कार्यप्रणाली में शामिल करने और इसे डीएसपी स्तर तक लागू करने के निर्देश दिए। वहीं नशा मुक्त भारत के निर्माण के लिए उन्होंने ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ के तहत ‘डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’ (3D) मॉडल पर काम करने पर बल दिया और सभी डीजीपी को राज्यों में समर्पित टीमें गठित करने को कहा। सीमा सुरक्षा के संदर्भ में उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों में सभी भूमि-सीमा वाले राज्यों के साथ ‘चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा दृष्टिकोण’ साझा किया गया है। देश को शीघ्र घुसपैठिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्यों में वरिष्ठ आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया गया है। उन्होंने अवैध घुसपैठियों को देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकी के लिए गंभीर खतरा बताया।
अमित शाह ने जानकारी दी कि सरकार के कड़े तंत्र और ‘भारतपोल’ के प्रभावी समन्वय से वर्ष 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस लाया जा चुका है। तकनीकी मोर्चे पर मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के तकनीकी उन्नयन को चार गुना बढ़ाया जाएगा। साथ ही सीसीटीएनएस, आईसीजेएस, नैटग्रिड और नैफिस के एकीकृत डेटा बैंक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर सटीक खुफिया सूचनाएं जुटाने पर जोर दिया गया। वैश्विक अस्थिरता, साइबर युद्ध, ऊर्जा असुरक्षा और कट्टरपंथ को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय नीति बनाने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने आईबी को अगले सम्मेलन से पहले सभी तटीय जिलों के साथ एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया।



