त्योहारी मांग के बीच प्याज बाजार को स्थिर रखने की सरकारी पहल: नासिक से ‘कांदा एक्सप्रेस’ रवाना, ₹35 में मिलेगा प्याज

ओणम, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन में प्याज की मौसमी मांग को संतुलित करने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से सुनियोजित रिलीज शुरू कर दी है। आपूर्ति व्यवस्था को गति देने के लिए नासिक से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए पहली ‘कांदा एक्सप्रेस’ रवाना कर दी गई है। इसके साथ ही देश भर में आम उपभोक्ताओं को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की निश्चित दर पर प्याज उपलब्ध कराने की बहु-स्तरीय योजना लागू की गई है।
मांग वाले प्रमुख शहरों में प्याज की त्वरित खेप पहुंचाने के लिए रेल और सड़क नेटवर्क का समन्वित इस्तेमाल किया जा रहा है। नई दिल्ली के लिए रेल खेप के अतिरिक्त अमृतसर, जम्मू, चंडीगढ़, लखनऊ, वाराणसी, पटना, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई और एर्नाकुलम जैसे केंद्रों को सड़क मार्ग से जोड़ा गया है। खुदरा स्तर पर एनसीसीएफ, नेफेड, केंद्रीय भंडार और सफल के 200 से अधिक स्थायी आउटलेट्स और 90 मोबाइल वैन के जरिए सीधे उपभोक्ताओं तक बिक्री की जा रही है।
भंडारण और खरीद प्रबंधन को आधुनिक बनाते हुए वर्ष 2026-27 में पहली बार केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को पीएसएफ प्याज बफर का संरक्षक बनाया गया है। 15 मई 2026 से आरंभ हुई खरीद प्रक्रिया के तहत तय 2 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य में से 1.21 लाख मीट्रिक टन रबी प्याज की खरीद पूरी कर ली गई है। पिछले वर्षों में लॉजिस्टिक्स के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए इस वर्ष भी आपूर्ति व्यवस्था को चुस्त रखा गया है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 307.37 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन अनुमानित है, जो पिछले वित्त वर्ष के 307.67 लाख मीट्रिक टन के समतुल्य है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में 3.82 लाख मीट्रिक टन प्याज का सफल निर्यात किया गया, जिसका मुख्य गंतव्य मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और नेपाल रहे। इस मजबूत निर्यात के बाद भी घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
मूल्य निगरानी तंत्र के तहत देश के 579 केंद्रों से दैनिक इनपुट एकत्र किए जा रहे हैं। 26 अगस्त 2026 के बाजार आंकड़ों के अनुसार आवश्यक दालों और सब्जियों के भाव नियंत्रण में हैं, जिसमें टमाटर, आलू और चना दाल की दरें बीते साल की समान अवधि से नीचे बनी हुई हैं। सरकार का उद्देश्य उत्पादन, बफर स्टॉक और सटीक बाजार हस्तक्षेप के माध्यम से किसानों को उचित प्रतिफल दिलाना और उपभोक्ताओं को मूल्य वृद्धि के दबाव से बचाना है।



