नेपाल: भोटे कोशी में अचानक आई भीषण बाढ़ से चार लोगों की मौत, 13 जलविद्युत परियोजनाएं और कई बस्तियां प्रभावित

नेपाल में तिब्बत सीमा से सटे रसुवा और आसपास के इलाकों में बुधवार तड़के भोटे कोशी नदी में आए अप्रत्याशित उफान ने भारी तबाही मचाई। स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कम से कम चार लोगों की जान चली गई, जबकि कई बस्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।
बागमती प्रांतीय पुलिस कार्यालय के अनुसार, नुवाकोट जिले के बिदुर नगरपालिका क्षेत्र में त्रिशूली नदी के तट से तीन पुरुषों और एक महिला के शव बरामद किए गए हैं। वहीं, सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने जानकारी दी कि रसुवा क्षेत्र से सुरक्षा बल के चार जवान लापता हैं, जिनकी तलाश में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
राजधानी काठमांडू से लगभग 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित रसुवा जिला इस आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के मुताबिक, कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू और पांच निर्माणाधीन समेत 13 पनबिजली परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आई हैं। इनमें प्रमुख रूप से रसुवागढ़ी (111 मेगावाट), संजेन खोला (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। इसके अलावा स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मेलुंग और शांतिबाजार समेत करीब एक दर्जन बस्तियों में पानी भर गया है।
रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी और मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना के अनुसार, नेपाल-तिब्बत व्यापार के लिहाज से अहम सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई वाहन व सामान तेज बहाव में बह गए हैं और हाल ही में बना एक पुल भी ध्वस्त हो गया है। तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और रसुवागढ़ी स्थित पुलिस चौकियों को भी भारी क्षति पहुंची है, जबकि धादिंग के गजुरी में एक पुल बह गया है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय आपात बैठक के उपरांत सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव कार्यों में तैनात किया गया है। इस अभियान में 12 हेलीकॉप्टर, पांच ड्रोन और तीन खोजी श्वान लगाए गए हैं। सेना ने स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। घायलों की सहायता के लिए त्रिशूली स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किया गया है तथा पांच डॉक्टरों सहित 16 स्वास्थ्यकर्मियों के दल को एमआई-17 हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है।
जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ के अनुसार, रसुवा में स्थानीय वर्षा नहीं हुई थी; लिहाजा तिब्बत की ओर बादल फटने, हिमस्खलन अथवा हिमनद झील टूटने (GLOF) को इस बाढ़ का संभावित कारण माना जा रहा है। खतरे के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी भोटे कोशी में आई बाढ़ से रसुवा में 10 लोगों की मौत हुई थी।



