बेहतर जीडीपी वृद्धि के बीच कमजोर खुले शेयर बाजार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर दर्ज करने के बाद भी मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। वैश्विक बाजारों की सुस्ती, कच्चे तेल में तेजी तथा अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के रुख को सीमित कर दिया।

कारोबार के शुरुआती घंटों में प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 95.14 अंक (0.12%) की गिरावट के साथ 76,862.13 के स्तर पर आ गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में भी 21.35 अंक (0.09%) का नुकसान दर्ज किया गया और यह 24,059.05 के स्तर पर आ गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एशियाई बाजारों का मिजाज मिला-जुला रहा, जहां बिकवाली का असर अधिक दिखा। हांगकांग का प्रमुख इंडेक्स हैंग सेंग 1.11 प्रतिशत, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.71 प्रतिशत और जापान का निक्केई 225 0.21 प्रतिशत नीचे आया। दूसरी ओर, ताइवान वेटेड इंडेक्स में 1.50 प्रतिशत, इंडोनेशिया के जकार्ता में 0.86 प्रतिशत, थाईलैंड के SET में 0.10 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट में 0.03 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।

वैश्विक निवेशकों के सतर्क होने की एक प्रमुख वजह अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है, जहां 10-वर्षीय यील्ड 4.77 प्रतिशत और 30-वर्षीय यील्ड 5.24 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यील्ड का यह स्तर इक्विटी बाजार से पूंजी निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में लगाने की संभावना को बल देता है। पिछले अमेरिकी सत्र में भी S&P 500 में 0.33 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.12 प्रतिशत की कमजोरी रही थी, हालांकि डॉव जोन्स फ्यूचर्स 0.12 प्रतिशत की मामूली बढ़त पर था।

कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए दबाव का कारण बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 0.73 प्रतिशत चढ़कर 91.15 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 86.64 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज हुआ। यद्यपि घरेलू आर्थिक विकास के 7.8 प्रतिशत के आंकड़े दीर्घकालिक मजबूती दर्शाते हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली की आशंका और अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते निकट भविष्य में घरेलू सूचकांकों पर दबाव बना रह सकता है।

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