सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम: सरकार ने अधिसूचित की 1.27 लाख करोड़ रुपये की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना

इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप उत्पादन के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सोमवार को 1.27 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट वाली ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना की अधिसूचना जारी की। इस कदम का मुख्य ध्येय चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और आधुनिक विनिर्माण के संपूर्ण तंत्र को भारत में सशक्त करना है।
जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस नई योजना को छह मुख्य घटकों में बांटा गया है। इसके तहत भारतीय कंपनियों द्वारा चिप डिजाइन तैयार करने, आवश्यक पूंजीगत मशीनरी के निर्माण, फैब यूनिट्स की स्थापना तथा पैकेजिंग व टेस्टिंग जैसे कार्यों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार का दृष्टिकोण केवल विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने तक सीमित न होकर पूरे सेमीकंडक्टर परिवेश को विकसित करने का है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और तकनीकी आवश्यकताओं के आधार पर रणनीतिक उत्पादों के चयन हेतु एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई जा रही है। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) संयुक्त रूप से इस समिति की अध्यक्षता करेंगे।
श्री वैष्णव के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य रणनीतिक क्षेत्रों में सरकारी निवेश को केंद्रित करना और स्थानीय क्षमताओं को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत सेंसर जैसे घटकों की अपनी लगभग 100 फीसदी घरेलू जरूरतों को स्थानीय उत्पादन से पूरा करने की स्थिति में पहुंचेगा।
उल्लेखनीय है कि ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उपभोक्ता उपकरणों में सेमीकंडक्टर की अनिवार्य भूमिका को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजी आपूर्ति समस्याओं के बाद भारत ने इसे अपनी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया है।



