बिश्केक में एससीओ का 26वां शिखर सम्मेलन संपन्न: पीएम मोदी ने युद्ध के विकल्प के रूप में कूटनीति और आतंक के खिलाफ एकजुटता पर दिया बल

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) राष्ट्राध्यक्ष परिषद की 26वीं बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत का प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्रीय स्थिरता, विकास तथा कूटनीति पर देश का दृष्टिकोण साझा किया।
सम्मेलन के उपरांत विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि इस बैठक में साझा बिश्केक घोषणापत्र के अतिरिक्त चार समझौता ज्ञापनों तथा 20 से अधिक महत्वपूर्ण निर्णयों को औपचारिक रूप से अंगीकार किया गया। यह फैसले ऊर्जा संरक्षण, परमाणु सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी बदलाव और नशीले पदार्थों के संकट से निपटने जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। भारत द्वारा आगे बढ़ाई गई कई प्रमुख पहलों—जैसे एससीओ चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा बनाना, युवा लेखक सम्मेलन, युवा वैज्ञानिक मंच और सभ्यता संवाद मंच—को घोषणापत्र में शामिल किया गया।
सचिव ने बताया कि 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चले इस सम्मेलन में नेताओं ने संगठन की 25 वर्षों की यात्रा का आकलन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मेजबान राष्ट्रपति सदिर जापारोव का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह 25वीं वर्षगांठ भविष्य के अगले 25 वर्षों की दिशा तय करने का एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि ढाई दशकों के निरंतर संवाद को अब ठोस उपलब्धियों का रूप देना होगा।
प्रधानमंत्री ने पूर्व में प्रस्तावित ‘सुरक्षा, संपर्क और अवसर’ के फॉर्मूले का हवाला देते हुए सामूहिक कार्ययोजना पर बल दिया। वैश्विक टकरावों के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्धभूमि किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं दे सकती, बल्कि समाधान केवल कूटनीति और संवाद से ही संभव है। आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने इसके पूरे तंत्र को ध्वस्त करने की मांग उठाई और रेखांकित किया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में किसी भी प्रकार का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए।
यूरेशिया क्षेत्र की सुरक्षा चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिरता इस पूरे क्षेत्र की शांति के लिए बेहद जरूरी है, जहां भारत निरंतर विकास और मानवीय मदद उपलब्ध करा रहा है। संपर्क गलियारों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत व्यापार बढ़ाने वाले विश्वसनीय बुनियादी ढांचे का पक्षधर है, लेकिन ऐसी हर परियोजना में राष्ट्रों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा आदर किया जाना चाहिए।
नवाचार, तकनीक और जन-संपर्क को नए अवसरों का स्रोत बताते हुए मोदी ने सम्मेलन में युवा भागीदारी को प्राथमिकता देने की प्रशंसा की। उन्होंने घोषणा की कि भारत सदस्य देशों के बीच ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत बनाने के उद्देश्य से इसी साल पहले ‘एससीओ सभ्यता संवाद मंच’ की मेजबानी करने जा रहा है।



