पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा की ओर सेना का कदम: वित्त वर्ष 2026-27 में 41 सैन्य स्टेशन पीएनजी से होंगे लैस

भारतीय सेना ने अपने विभिन्न प्रतिष्ठानों में पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता समाप्त कर पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का उपयोग शुरू करने की व्यापक तैयारी की है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर 41 सैन्य स्टेशनों को गैस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस योजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए दिल्ली कैंट के मानेकशॉ सेंटर में ‘पीएनजी ट्रांजिशन वेबिनार-2026’ का आयोजन किया गया।
सेना द्वारा तैयार की गई रूपरेखा के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन की उपलब्धता व्यावहारिक रूप से संभव है, वहां के परिसरों को क्रमवार तरीके से गैस आधारित प्रणाली में बदला जाएगा। पहले चरण में चयनित 41 स्टेशनों के सफल रूपांतरण के बाद उन तमाम अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों में भी इसका विस्तार किया जाएगा जहां यह आपूर्ति पहुंचाई जा सकती है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के गैस आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने के राष्ट्रीय विजन का हिस्सा है।
ईंधन के क्षेत्र में किया जा रहा यह बदलाव ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और एक टिकाऊ ढांचा खड़ा करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। रूपांतरण के काम को बाधा रहित रखने के लिए वेबिनार में ‘इंडियन आर्मी पीएनजी गाइड’ का विमोचन किया गया। यह दस्तावेज सैन्य इकाइयों के लिए सुरक्षा नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रशासनिक अनुमतियों और जमीनी क्रियान्वयन से जुड़ी तमाम जानकारियों के लिए एक साझा मार्गदर्शक बनेगा।
सम्मेलन के दौरान गैस ग्रिड स्थापित करने के साथ-साथ योजना के सभी नीतिगत और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की गई। नीतिगत ढांचे, वैधानिक अनुमतियों, जमीन के प्रावधानों, निर्माण से जुड़ी जरूरतों, सुरक्षा मानकों तथा लेखा व भुगतान तंत्र जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। इस बैठक में सेना के आला अधिकारियों के अलावा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड, सैन्य अभियंता सेवा, रक्षा संपदा संगठन और संबंधित सिटी गैस वितरण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपनी तैयारियों व पूर्व अनुभवों को साझा किया।
सुरक्षा के सभी कड़े पैमानों को सुनिश्चित करते हुए सेना ने स्पष्ट संदेश दिया कि यह केवल ईंधन में बदलाव का मामला नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित, सक्षम और लंबे समय तक चलने वाली ऊर्जा प्रणाली को स्थापित करने का प्रयास है। 41 स्टेशनों से शुरू होने वाला यह परिवर्तन भविष्य में सेना के अन्य सभी उपयुक्त ठिकानों तक पहुंचाया जाएगा।



