प्रधानमंत्री मोदी और बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर की बैठक: आर्थिक साझेदारी, सुरक्षा परिषद सुधार और नए क्षेत्रों में सहयोग पर जोर

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 2 से 4 सितंबर तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। फरवरी 2025 में कार्यभार संभालने के पश्चात डी वेवर की यह पहली भारत यात्रा है। इस यात्रा में बेल्जियम के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकेन के नेतृत्व में एक वरिष्ठ आधिकारिक व व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी उनके साथ उपस्थित है।
वार्ता के आरंभ में दोनों राजनेताओं ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्लैंडर्स फील्ड्स में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदान को स्मरण किया। दोनों पक्षों ने याद किया कि बेल्जियम वर्ष 1947 में स्वतंत्र भारत के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित करने वाले अग्रणी यूरोपीय देशों में शामिल था। दोनों नेताओं ने कहा कि आपसी विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित यह रिश्ता समय के साथ और मजबूत हुआ है। वर्ष 2027 में संबंधों की 80वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक अवसर मानते हुए व्यापार, हरित बदलाव, तकनीक, रक्षा और संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में नियमित तंत्र के जरिए साझेदारी को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के संदर्भ में, दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की पुष्टि करते हुए सुरक्षा परिषद में अविलंब सुधार की वकालत की। बेल्जियम ने एक विस्तारित और सुधरे हुए यूएनएससी मंच पर भारत की स्थायी सदस्यता के प्रति अपना समर्थन दोहराया। भारत-ईयू संबंधों पर चर्चा के दौरान नेताओं ने निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत से जुड़े समझौतों को जल्द पूरा कर क्रियान्वित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, जुलाई 2026 में ब्रसेल्स में संपन्न मंत्रिस्तरीय बैठक के संदर्भ में व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की प्रगति का स्वागत करते हुए वर्ष 2030 तक के रणनीतिक एजेंडे को समर्थन दिया गया।
व्यापारिक संभावनाओं को गति देने के उद्देश्य से दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। दुनिया की 24वीं बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में बेल्जियम और 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर भारत ने आर्थिक सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने मार्च 2025 में राजकुमारी एस्ट्रिड की अगुवाई में आए आर्थिक मिशन के सकारात्मक परिणामों पर संतोष व्यक्त किया, जिसने स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, एयरोस्पेस और डिजिटल नवाचार जैसे कई क्षेत्रों में आपसी साझेदारी को मजबूत किया था।
द्विपक्षीय संबंधों के विविधीकरण के तहत दोनों देशों ने फार्मा, जैव प्रौद्योगिकी, नैदानिक अनुसंधान के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में निजी क्षेत्र को जोड़ने पर सहमति जताई। मुंबई और सूरत को एंटवर्प से जोड़ने वाले ऐतिहासिक हीरा व्यापार को नए आयाम देने तथा भारतीय बंदरगाहों के विकास, ड्रेजिंग और अपतटीय पवन ऊर्जा में बेल्जियम के तकनीकी कौशल का सहयोग लेने पर भी सहमति बनी। इसके अतिरिक्त, खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में बीआईएनए नेटवर्क के सहयोग को रेखांकित किया गया।
वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों की समीक्षा की। यूक्रेन संकट के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के तहत कूटनीतिक संवाद के जरिए न्यायसंगत और स्थायी शांति की स्थापना का समर्थन किया गया, जबकि पश्चिम एशिया के मौजूदा चिंताजनक घटनाक्रमों पर भी दोनों पक्षों ने अपने विचार साझा किए।



