2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर एमडीआर को आरबीआई का समर्थन, बताया डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अहम पहल

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने यूपीआई के माध्यम से होने वाले व्यापारिक लेनदेन पर सरकार के नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे का समर्थन किया है। केंद्रीय बैंक ने इसे देश के डिजिटल भुगतान तंत्र को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने वाला एक अहम कदम करार दिया है।

आरबीआई ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि 2,000 रुपये से अधिक राशि के यूपीआई मर्चेंट भुगतानों पर एमडीआर लागू करने से डिजिटल पेमेंट तंत्र को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैंक का मानना है कि उच्च मूल्य के इन लेनदेनों पर एमडीआर व्यवस्था लागू होने से यूपीआई नेटवर्क का देश भर में सुरक्षित विस्तार होगा और व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं को लगातार बेहतर व नए तकनीकी समाधान मिलते रहेंगे।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा मंगलवार को जारी की गई नई व्यवस्था के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई सौदों पर 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर वसूला जाएगा। यह नियम आगामी 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा व्यावसायिक लेनदेनों पर प्रभावी होगा। राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई का उपयोग पहले की तरह ही पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।

केंद्रीय बैंक ने व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए कहा कि व्यक्तियों के बीच (पी2पी) और व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) के सभी यूपीआई सौदे ग्राहकों के लिए बिना किसी शुल्क के चलते रहेंगे। इसके साथ ही, व्यापारियों के लिए भी 2,000 रुपये तक के पी2एम लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा; केवल इससे अधिक राशि के व्यापारिक भुगतानों पर ही एमडीआर लागू किया जा सकेगा।

आरबीआई के अनुसार, सेवा प्रदाताओं के बीच एमडीआर का उचित बंटवारा होने से आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और भुगतान स्वीकृति नेटवर्क में निरंतर निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे नेटवर्क का विस्तार होगा और डिजिटल लेनदेनों की संख्या में और वृद्धि होगी। केंद्रीय बैंक ने दोहराया कि वह यूपीआई को सुरक्षित, सुगम, सस्ता और सभी की पहुंच में बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

एनपीसीआई के प्रावधानों के मुताबिक, पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट (पी2पीएम) श्रेणी में आने वाले छोटे विक्रेताओं पर शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। इसके दायरे में वे छोटे कारोबारी आएंगे, जो क्यूआर कोड के माध्यम से सीधे अपने बैंक खाते में प्रतिमाह 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी विशिष्ट श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रति सौदा 5 रुपये का तय शुल्क लगेगा। इसके अलावा, टियर-3 तथा छोटे शहरों में डिजिटल नेटवर्क के विस्तार और छोटे व्यापारियों की मदद के लिए एक समर्पित फंड बनाने का भी प्रस्ताव है।

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