भारत में निर्मित सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक आपूर्ति शुरू, सेमीकॉन इंडिया के मंच से बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के पांचवें सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए देश की तकनीकी प्रगति और उत्पादन क्षमताओं का ब्योरा प्रस्तुत किया। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक सृजन क्षमता और इक्कीसवीं सदी की आधुनिक तकनीक का संगम ही विकसित तथा स्वावलंबी भारत के निर्माण को आगे बढ़ा रहा है।

प्रधानमंत्री ने पिछले 15 दिनों के महत्वपूर्ण पड़ावों का विवरण देते हुए कहा कि यह समय देश की तीव्र विकास यात्रा को दर्शाता है। उन्होंने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का संदर्भ दिया, जहां टोकनाइजेशन, एजेंटिक एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी आधारित समावेशी वित्तीय ढांचे पर मंथन हुआ। इसके साथ ही, लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण संचालन को विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा कदम बताया। उन्होंने सितंबर की रिपोर्ट में दर्ज 7.8% की जीडीपी दर और जापान की रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की सॉवरिन रेटिंग में किए गए उन्नयन को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था की साख निरंतर बढ़ रही है।

उत्पादन क्षेत्र की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सूरत और मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर इकाइयों में कमर्शियल प्रोडक्शन आरंभ हो चुका है और यहां निर्मित चिप्स का वितरण देश-विदेश में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस उद्योग में आवश्यक तकनीकी दक्षता प्राप्त करने में वर्षों का समय लगता है। केंद्र सरकार का ध्यान विशेष रूप से ऐसी फैबलेस कंपनियों को बढ़ावा देने पर है जो चिप की रूपरेखा तैयार करती हैं और निर्माण फाउंड्रीज से कराती हैं, ताकि देश में बौद्धिक संपदा का विकास हो। इसके समानांतर, एआई आधारित प्रणालियों को गति देने के लिए सिलिकॉन फोटोनिक्स और कंपाउंड सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम जारी है।

उद्योग और कौशल विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि निर्धारित 1 लाख छात्रों में से 70,000 इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत भारतीय शोधकर्ताओं को देश की तकनीकी यात्रा से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही, उन्होंने औद्योगिक घरानों से भारत में आरएंडडी का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया ताकि दुनिया की सुरक्षित एवं विश्वसनीय विनिर्माण आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

अंत में, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई डेटा केंद्रों में उच्च क्षमता वाले प्रोसेसरों के उपयोग के कारण कंप्यूटिंग शक्ति और विद्युत की खपत तेजी से बढ़ेगी। 20 प्रतिशत से अधिक की दर से आगे बढ़ रहे वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार को ध्यान में रखते हुए भारत बिजली और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि सेमीकंडक्टर प्लांट्स की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विद्युत अवसंरचना में व्यापक स्तर पर निवेश किया जा रहा है।

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