मानकों के उल्लंघन पर एफएसएसएआई की सख्त कार्रवाई, पैराडाइज डिस्टिलरीज का कामकाज 15 दिन के लिए ठप
खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को कार्यस्थल के निरीक्षण के दौरान कई नियमों की अनदेखी सामने आने पर पैराडाइज डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस को निरस्त (निलंबित) कर दिया। प्राधिकरण की ओर से दी गई सूचना के तहत, कंपनी पर यह रोक 15 दिनों की समयावधि के लिए फौरन लागू कर दी गई है।
प्राधिकरण ने संबंधित खाद्य संचालक को निलंबन के दौरान विनिर्माण और व्यापार से जुड़ा हर काम रोकने को कहा है। इसके साथ ही संस्था को निर्धारित अवधि में सभी पाई गई गड़बड़ियों को दूर करने की ताकीद की गई है। जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी पेय निर्माण में समयसीमा पार कर चुके (एक्सपायर्ड) एसेंस और रंगों का इस्तेमाल कर रही थी, जिसका सीधा असर तैयार उत्पाद की सुरक्षा और उसके स्तर पर पड़ सकता था।
इकाई के भीतर साफ-सफाई का स्तर भी बेहद असंतोषजनक पाया गया। निरीक्षण में पाया गया कि अंतिम ब्लेंडिंग टैंक खुला पड़ा था, बोतलों की धुलाई करने वाले उपकरणों पर चिकनाई और गर्द जमा थी, तथा जगह-जगह कांच के टुकड़े पड़े थे जिनके प्रबंधन का कोई सुनियोजित तरीका वहां मौजूद नहीं था।
नियामक के अनुसार, केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस के बाद भी उत्पाद लेबल में जरूरी संशोधन लागू नहीं किए गए थे, और कंपनी इस मामले में कोई उचित स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रही। संयंत्र में ढांचागत स्तर पर भी कई विसंगतियां दर्ज की गईं—जैसे खराब दरवाजे, काम करने के लिए कम जगह और अपर्याप्त रोशनी, दीवारों से उखड़ता रंग-रोगन, पैकिंग की अस्वच्छ जगह, भंडारण के गलत तरीके, कीट रोकथाम का अभाव और कामगारों की व्यक्तिगत अस्वच्छता।
इसके साथ ही, कर्मियों की चिकित्सीय जांच, टीकों का ब्योरा, सुरक्षा परिधानों का इस्तेमाल, कार्यस्थल और मशीनों की समयबद्ध सफाई का रिकॉर्ड, कीट नियंत्रण के दस्तावेज, उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे की प्रणाली और सुरक्षा ऑडिट से जुड़े तय प्रावधानों का भी मौके पर पालन नहीं होता मिला।
एक अन्य मामले में, एफएसएसएआई ने शुक्रवार को ही नेस्ले इंडिया के दो शिशु खाद्य उत्पादों—लैक्टोजेन प्रो 1 और एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1—में नियमों के कथित उल्लंघन पर तीन न्यायनिर्णयन मामलों की शुरुआत की। डिजिटल मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए नोटिस में कहा गया कि ई-कॉमर्स साइटों पर इन उत्पादों के संबंध में किए जा रहे विज्ञापनी दावों पर सवाल खड़े किए गए हैं।
इस मामले पर नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके उत्पाद पूरी तरह से वैधानिक मानकों के तहत ही बनाए जाते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि इन उत्पादों और उनके लेबल को एफएसएसएआई की विशेषज्ञ समिति से बाकायदा मंजूरी हासिल है। कंपनी ने जांच अधिकारियों के समक्ष पुनः अपना विस्तृत रुख रख दिया है और लेबल पर लिखी हर बात वैज्ञानिक प्रमाणों व तथ्यों पर पूरी तरह खरी उतरती है।



