सीईपीए वार्ता को गति देने के लिए भारत और कनाडा के मंत्रियों के बीच विमर्श, इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य

द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की प्रगति को लेकर नई दिल्ली के संदर्भ में विस्तृत बातचीत की।

बैठक के विवरण को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों ने अपने नेतृत्व की उस प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की है, जिसका ध्येय वार्ता प्रक्रिया को गति देकर समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देना है। श्री गोयल के अनुसार, यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं और निवेश प्रवाह के लिए व्यापक अवसर सृजित करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सीईपीए का समयबद्ध निष्कर्ष दोनों देशों के साझे लक्ष्यों को सिद्ध करने, द्विपक्षीय व्यापार को कई गुना बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को परस्पर लाभ के आधार पर सुदृढ़ करने में प्रभावी सिद्ध होगा।

प्रस्तावित समझौते के सिलसिले में इसी हफ्ते नई दिल्ली में चौथे दौर की वार्ता संपन्न हुई, जो पांच दिनों तक चली। दोनों पक्षों का साझा प्रयास है कि चालू वर्ष के अंत तक समझौते की रूपरेखा को अंतिम स्वरूप दे दिया जाए। इन बैठकों के दौरान वस्तुओं के व्यापार, सेवाओं, व्यापार की तकनीकी अड़चनों तथा मूल नियमों (रूल्स ऑफ ओरिजिन) जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा हुई। इससे पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने जुलाई में ओटावा में तीसरे दौर की वार्ता की थी।

वार्ता के इस रोडमैप की नींव इसी वर्ष मार्च में रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नई दिल्ली में बैठक कर सीईपीए को वर्ष के अंत तक पूरा करने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया था। उस बैठक में दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर भी अपनी सहमति व्यक्त की थी।

द्विपक्षीय व्यापार के परिदृश्य पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के मध्य 8.66 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार हुआ, जिसमें भारतीय निर्यात का आंकड़ा 4.22 अरब डॉलर रहा। भारत से कनाडा को निर्यात की जाने वाली मुख्य वस्तुओं में फार्मास्युटिकल उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी के यांत्रिक हिस्से, लोहे और इस्पात के सामान, कार्बनिक रसायन, जेम्स एवं ज्वेलरी, वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद और समुद्री उत्पाद शामिल हैं।

इसके विपरीत, भारत कनाडा से बड़े पैमाने पर दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, वुड पल्प, विमान व मशीनरी के पुर्जे, रत्न और लोहा-एल्युमीनियम स्क्रैप का आयात करता है। इसके अतिरिक्त, सेवा क्षेत्र के निर्यात में भारतीय आईटी उद्योग अपनी अग्रणी भूमिका बनाए हुए है। इस समझौते के प्रभावी होने से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।

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