ऊर्जा सुरक्षा और तेल बाजार की स्थिरता के लिए भारत व ओपेक में सहमति, वियना में होगी अगली बैठक

नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारत और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने अपनी ऊर्जा साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। बदलते वैश्विक परिदृश्य और बढ़ती मांग के बीच दोनों पक्षों ने आपसी रणनीतिक सहयोग को विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस द्विपक्षीय विमर्श की संयुक्त अध्यक्षता केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ओपेक के महासचिव हैथम अल घैस ने की।
जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वार्ता में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती और पेट्रोलियम क्षेत्र में समयबद्ध एवं पर्याप्त पूंजी निवेश जैसे अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई। इसके साथ ही ऊर्जा परिदृश्य के अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक रुझानों की समीक्षा की गई, जिसमें वैश्विक आर्थिक प्रगति और ईंधन खपत को गति देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भू-राजनीतिक तनावों और बाजार की उथल-पुथल के बीच ऊर्जा आपूर्ति में पारदर्शिता व स्थिरता बनाए रखने के लिए ओपेक के कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक संतुलित, स्थायी और पूर्वानुमान लगाने योग्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यवस्था के निर्माण के लिए दोनों पक्षों का साथ मिलकर काम करना आवश्यक है।
श्री पुरी ने रेखांकित किया कि भारत और ओपेक का संबंध स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक और पारस्परिक लाभ पर आधारित है। भारत इस दीर्घकालिक सहयोग को अत्यधिक महत्व देता है, जिसने ऊर्जा क्षेत्र की प्राथमिकताओं को समझने में मदद की है। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत भविष्य में भी वैश्विक ऊर्जा मांग का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। ऐसे में उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सतत संवाद ही निवेश को गति देने, ऊर्जा तंत्र को लचीला बनाने और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने का आधार है।
ओपेक के महासचिव हैथम अल घैस ने कहा कि भारत के साथ संबंध संगठन की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2015 में नई दिल्ली से प्रारंभ हुए ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद के 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं और यह मंच समय के साथ अधिक परिपक्व हुआ है।
अल घैस ने ऊर्जा चुनौतियों से निपटने में भारत के व्यावहारिक, संतुलित और यथार्थवादी दृष्टिकोण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत की कई नीतियां ओपेक की प्राथमिकताओं से मेल खाती हैं। साथ ही उन्होंने वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सराहा। बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद की 8वीं उच्चस्तरीय बैठक पारस्परिक सहमति से तय तिथि पर वियना में आयोजित करने का निर्णय लिया।



