वैश्विक दबाव और कच्चे तेल में उछाल से शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1,248 अंक टूटा

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गुरुवार को भारी बिकवाली का माहौल रहा, जिसके चलते दोनों बेंचमार्क इंडेक्स बड़े नुकसान के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में आई कमजोरी के कारण निवेशकों ने जोखिम से परहेज करना शुरू कर दिया, जिसका सीधा और नकारात्मक असर विशेष रूप से बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला।
कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 383.70 अंक अथवा 1.64 प्रतिशत का नुकसान झेलते हुए 23,063.10 के स्तर पर आ गया।
बाजार में छाई यह सुस्ती सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी तेज बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 2.25 प्रतिशत लुढ़ककर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी के घटकों में केवल तीन कंपनियों के शेयर ही बढ़त हासिल कर सके, जबकि अन्य सभी लाल निशान में बंद हुए। बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे और इन्होंने सूचकांकों को नीचे खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
सेक्टोरल आधार पर वित्तीय शेयरों पर बिकवाली का सबसे अधिक दबाव रहा। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कायम अनिश्चितता ने इस सेक्टर के प्रति निवेशकों के रुझान को प्रभावित किया। परिणामस्वरूप, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स दिन के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टोरल सूचकांकों में रहे। दूसरी तरफ, बाजार के कुछ रक्षात्मक (डिफेंसिव) क्षेत्रों ने तुलनात्मक रूप से संयम दिखाया; निफ्टी मीडिया और निफ्टी फार्मा में बाकी बाजार के मुकाबले कम गिरावट आई, हालांकि ये भी गिरावट से बच नहीं सके।
तकनीकी रुख पर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी लगातार 23,000 के स्तर से नीचे बंद होता है, तो गिरावट का यह दायरा 22,900 से 22,800 के स्तर तक बढ़ सकता है। वहीं, यदि बाजार संभलने का प्रयास करता है, तो 23,200 का स्तर तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) का काम करेगा। कच्चे तेल की ऊंची दरों और वैश्विक बॉन्ड बाजार की स्थिति से सतर्क निवेशक फिलहाल इक्विटी में अपना जोखिम घटाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।


