विकसित भारत के संकल्प की रीढ़ हैं युवा, राजनीति से बड़ा है राष्ट्र-निर्माण का ध्येय: पीएम मोदी

वडनगर से काशी तक की यात्रा पर निकले ‘सेवा संकल्प यात्रियों’ के साथ शुक्रवार को आयोजित डिजिटल संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सेवा भाव को अनुकरणीय बताया। प्रधानमंत्री ने इस पहल से जुड़े लोगों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी ही आने वाले समय में विकसित भारत के निर्माण का मुख्य आधार बनेगी।

प्रधानमंत्री ने दोनों प्राचीन नगरों के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वडनगर उनकी जन्मस्थली है, जबकि काशी उनकी दूसरी कर्मस्थली रही है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मूल तत्व यही है कि दोनों शहर एक सहस्राब्दी से भी अधिक समय से सांस्कृतिक रूप से ऊर्जावान रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीष मिलता है, तो वडनगर में हाटकेश्वर महादेव का प्रेम और कृपा प्राप्त होती है।

क्षेत्र में संचालित सेवा कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यात्रियों के जमीनी अनुभवों को जानकर उन्हें लगा कि वे भी प्रत्यक्ष रूप से इस यात्रा में उनके सहभागी हैं। बड़ी तादाद में लोगों के इस अभियान से जुड़ने और यात्रा से जुड़ी गतिविधियों के दृश्य साझा करने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।

संगठन के अपने पुराने दिनों के संस्मरण साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों और अभियानों के संचालन में मौसम के उतार-चढ़ाव, स्थान की भिन्नता और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की जरूरतों जैसी कई चुनौतियां सामने आती हैं। इसके उपरांत भी यात्रियों ने जिस दृढ़ता और ऊर्जा के साथ अपने दायित्व को निभाया, वह सराहनीय है।

प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ भाव से किए जाने वाले कार्यों को जनकल्याण की नींव बताया। उन्होंने कहा कि जब स्वार्थ से परे हटकर जनसेवा की जाती है, तभी आयुष्मान जैसी व्यापक लोक-कल्याणकारी योजनाएं आकार लेती हैं। दोनों शहरों के बीच यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने निश्चित तौर पर यह देखा होगा कि सेवा की इस संस्कृति को किस तरह आगे बढ़ाया गया है।

राष्ट्र निर्माण को सर्वोपरि बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावी राजनीति और शासन तंत्र अपनी जगह कार्य करते हैं, किंतु जीवन का व्यापक उद्देश्य राष्ट्र का उत्थान होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि हमारा संकल्प एक विकसित राष्ट्र का निर्माण करना है। वर्ष 2047 तक के लक्ष्य का संदर्भ देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा वर्ग इस विजन की रीढ़ है और भविष्य में इस प्रगति का सीधा लाभ भी उन्हीं को मिलेगा, अतः विकास के इस महायज्ञ में युवाओं की भागीदारी को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है।

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