मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में एशियन गेम्स दल का अभिनंदन: पीएम मोदी बोले- भारत बनेगा खेलों का वैश्विक केंद्र

एशियन गेम्स 2026 के भारतीय दल के सम्मान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे की मौजूदगी में 85 पदक जीतकर लौटे दल को बधाई दी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर नमन करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर तिरंगे की शान बढ़ाने वाले ये एथलीट पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
भारतीय दल के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार कई खेलों में दशकों पुराना सूखा समाप्त हुआ है। महिला हॉकी टीम ने 44 वर्ष बाद ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि पुरुष हॉकी टीम ने भी सोने का तमगा जीता। क्रिकेट और कबड्डी दोनों में महिला व पुरुष टीमों ने दोहरे स्वर्ण व पदक के रिकॉर्ड बनाए। तीरंदाजी में पांच स्वर्ण पदकों के साथ-साथ निशानेबाजी, मुक्केबाजी व कुश्ती में शानदार परिणाम आए। एथलेटिक्स में रिकॉर्ड प्रदर्शन के अतिरिक्त भारत ने भारोत्तोलन में 28 साल बाद और मैराथन में वर्ष 1982 के बाद पहली बार पदक जीता। इसके साथ ही सॉफ्ट टेनिस, सेलिंग और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स जैसी गैर-पारंपरिक स्पर्धाओं में भारत ने एशियन गेम्स के इतिहास में पहली बार पदक तालिका में अपना नाम दर्ज कराया।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कुल पदकों में 38 पदक महिला एथलीटों के नाम रहे, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 15 से 17 आयु वर्ग के युवा खिलाड़ियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि कम उम्र में खेल से जुड़ना बड़ी सफलताओं का मार्ग प्रशस्त करता है। सरकार अब 5 से 15 वर्ष के बच्चों में जमीनी स्तर पर प्रतिभा की खोज पर केंद्रित है, जिसे खेलो इंडिया और इमर्जिंग खेलो इंडिया के जरिए गति दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती दौर का स्मरण करते हुए कहा कि एक समय भारत सीमित स्पर्धाओं तक सिमटा था, किंतु विगत 12 वर्षों में पारदर्शी नीतियों और सुनियोजित निवेश से खेल परिवेश को पूरी तरह बदल दिया गया है।
प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि खेल महासंघों की मजबूती और खेलो इंडिया योजना के लिए 36,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। देश में 1,000 से ज्यादा खेलो इंडिया केंद्रों के अलावा टियर-2 और टियर-3 शहरों में ट्रैक, कोर्ट, स्टेडियम और पूल का जाल बिछाया जा रहा है। टॉप्स योजना के जरिए एथलीटों को 50,000 रुपये मासिक भत्ता और आवश्यकता पड़ने पर विदेशी प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था दी जा रही है। इसके अलावा नई खेल नीति, विंटर गेम्स, सांसद खेल प्रतियोगिताएं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आधुनिक संसाधन सुनिश्चित किए गए हैं ताकि हर खिलाड़ी को राष्ट्र के सहयोग का भरोसा रहे।
आगामी रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारियों, 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन और 2036 ओलंपिक की मेजबानी के संकल्प को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा वर्ग केवल खेलों में ही नहीं, बल्कि स्टार्टअप, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। खेलों के विस्तार से स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोथेरेपी, ब्रॉडकास्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित हो रहे हैं।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी पदक विजेताओं से अपने-अपने मूल क्षेत्रों, विद्यालयों और खेल मैदानों में जाकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने ‘जो खेलेगा, वो खिलेगा’ का संदेश देते हुए दल के साथ आत्मनिर्भर भारत, वर्ष 2047 तक विकसित भारत, विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होने और खेल जगत की महाशक्ति बनने के संकल्पों पर ‘यस, वी विल डू इट’ का संयुक्त नारा लगाया।



