मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में एशियन गेम्स दल से मिले प्रधानमंत्री, बोले— 85 पदकों की सफलता 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान

नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 में भाग लेकर लौटे भारतीय खेल दल से प्रत्यक्ष संवाद किया। जापान के आइची-नागोया में संपन्न हुए इन खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदकों की बदौलत कुल 85 मेडल जीतकर तालिका में चौथा पायदान हासिल किया है। प्रधानमंत्री ने इस उल्लेखनीय प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह जीत हर एक देशवासी की सामूहिक सफलता का प्रतीक है।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर पदकों का संचय करना खिलाड़ियों की कठोर तपस्या का प्रमाण है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब खेल के प्रति जुनून विजय में परिवर्तित होता है, तो उसका सकारात्मक असर खिलाड़ियों के व्यक्तित्व और चेहरे पर साफ देखा जा सकता है, जो समूचे राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरवशाली पल होता है।
तिरंगे के सम्मान को सर्वोच्च उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 140 करोड़ देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। खिलाड़ियों ने वैश्विक मंच पर देश के ध्वज की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है, जिससे यह उपलब्धि व्यक्तिगत सीमाओं से परे जाकर संपूर्ण राष्ट्र की पहचान बन गई है। उन्होंने सभी नागरिकों की ओर से पूरी खेल टुकड़ी के प्रति आभार प्रकट किया।
समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने सामूहिक खेलों में भारतीय दलों के दबदबे को चिन्हित किया। उन्होंने बताया कि हॉकी स्पर्धा में भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं क्रिकेट में भी पुरुष व महिला टीमों ने लगातार दूसरे संस्करण में पदक जीतकर पिछले रिकॉर्ड को सफलता से दोहराया। कबड्डी में भी भारतीय पुरुष और महिला टीमों का प्रदर्शन स्वर्णिम रहा।
अन्य प्रमुख खेल विधाओं में भारत की प्रगति का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि तीरंदाजी में 5 स्वर्ण पदक हासिल हुए, जबकि निशानेबाजी में दल ने निरंतरता और सटीकता का परिचय दिया। इसके साथ ही मुक्केबाजी और कुश्ती के मैदान में भी भारतीय दल ने उत्कृष्ट परिणाम अर्जित किए।
संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने ट्रैक एवं फील्ड में बने नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड्स की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि वेटलिफ्टिंग में 28 वर्षों के सूखे के बाद भारत ने पोडियम पर वापसी की है, जबकि वर्ष 1982 के बाद मैराथन स्पर्धा में देश को मिली पहली कामयाबी भारतीय खेलों के उभरते सामर्थ्य को दर्शाती है।



