संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक: अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए बने कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि

बाहरी अंतरिक्ष में बढ़ते सैन्यीकरण और शस्त्रों की होड़ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक सार्वभौमिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि तैयार करने का पुरजोर आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के दूसरे दल की प्रतिनिधि और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति ने देश का पक्ष रखते हुए कहा कि अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए एक बहुपक्षीय, निष्पक्ष और सत्यापन योग्य संधि समय की मांग है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से विचार रखते हुए सांसद सुधा मूर्ति—जो इंफोसिस संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी तथा ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की सास हैं—ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष की सुरक्षा और निरंतरता को किसी आंशिक दृष्टिकोण से सुरक्षित नहीं किया जा सकता। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरिक्ष में बल प्रयोग की परिभाषा, संभावित गलतफहमियों और रणनीतिक गलत आकलनों जैसे सभी खतरों को एक साथ संबोधित करना आवश्यक है। किसी एक खतरे पर ध्यान केंद्रित कर अन्य जोखिमों की अनदेखी करना वैश्विक सुरक्षा के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। भारत ने जिनेवा स्थित ‘निरस्त्रीकरण सम्मेलन’ (कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट) को इस संधि पर बहुपक्षीय विमर्श के लिए सबसे उपयुक्त मंच बताया।

सख्त वैश्विक नियमों की अनिवार्यता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि दोहरे उपयोग (ड्यूल-यूज) वाली अंतरिक्ष संपत्तियां और प्रौद्योगिकियां अब केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुकी हैं। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए उल्लेख किया कि वहां के वायु सेना सचिव ट्रॉय मीनक ने स्वयं यह पुष्टि की है कि अमेरिका ने अंतरिक्ष की कक्षा में संचालित होने वाले नियंत्रण हथियार तैनात किए हैं, जिससे हथियारों की वास्तविक तैनाती सार्वजनिक रूप से प्रमाणित होती है।

बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ की रोकथाम (पारोस – PAROS) के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद मतभेदों का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2008 में चीन और रूस द्वारा प्रस्तुत मसौदा संधि (पीपीडब्ल्यूटी) को आगामी वार्ताओं का ठोस आधार मानता है। हालांकि, अमेरिका ने इस मसौदे का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि इसमें जमीन से संचालित होने वाली उपग्रह-रोधी (एंटी-सैटेलाइट) प्रणालियों के खतरों को शामिल नहीं किया गया है और इसके सत्यापन के प्रावधान भी कमजोर हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2024 में अमेरिका और जापान द्वारा सुरक्षा परिषद में अंतरिक्ष में परमाणु अस्त्रों की तैनाती पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव को रूस ने वीटो के जरिए रोक दिया था।

अपने संबोधन के समापन पर सुधा मूर्ति ने दोहराया कि भारत पारदर्शिता, विश्वास बहाली और गैर-भेदभावपूर्ण नियमों का पूरी तरह समर्थक है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से आगाह किया कि विश्वास बहाली के ऐसे स्वैच्छिक उपाय किसी पूर्ण और कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते के सहायक अंग तो बन सकते हैं, लेकिन वे उसका स्थायी विकल्प कतई नहीं हो सकते।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button