दुशांबे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक: भारत ने आतंकवाद के खात्मे और संप्रभुता के सम्मान का आह्वान किया

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्ष परिषद (सीएचजी) के 25वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने सदस्य राष्ट्रों के साथ मिलकर साझा प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर विमर्श किया।

बैठक में अपनी बात रखते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि संगठन के सभी देशों को ऐसे क्षेत्रों में आपसी समन्वय और सहयोग को मजबूत करना चाहिए जिससे सभी का साझा हित जुड़ा हो। उन्होंने विशेष रूप से वाणिज्यिक गतिविधियों, निवेश प्रवाह, निर्बाध कनेक्टिविटी, नए नवाचारों और सामाजिक स्तर पर आपसी संबंधों को बेहतर करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया।

आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि का दृढ़ता से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्थायी अमन-चैन सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों को एकजुट होकर काम करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने इस सिद्धांत को सामने रखा कि कोई भी क्षेत्रीय भागीदारी आपसी सम्मान, सीमाओं की सुरक्षा, राष्ट्रीय संप्रभुता और एक-दूसरे के फायदे के दायरे में ही संभव है।

इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने बहुपक्षीय आर्थिक व व्यापारिक समझौतों की प्रगति का ब्योरा देखा। बातचीत में परिवहन नेटवर्क को आधुनिक बनाने, वित्तीय सहयोग को बढ़ाने, डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और सामाजिक विकास को रफ्तार देने वाले कदमों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया।

बैठक के अंतिम चरण में सभी प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने औपचारिक रूप से एक संयुक्त विज्ञप्ति पर सहमति जताई। इसके अंतर्गत आगामी वर्ष 2027 के एससीओ बजट, महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों और 2026-2030 के लिए तय पीएमटीईसी योजना को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई।

एससीओ का शासनाध्यक्ष परिषद मंच सदस्य देशों के बीच नीतिगत और व्यावहारिक आर्थिक तालमेल को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। साल 2017 से एससीओ के पूर्ण सदस्य के रूप में जुड़ा भारत लगातार संगठन के सभी प्रमुख उपक्रमों और वार्ताओं में अपनी प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

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