भारत-अमेरिका साझेदारी: मुंबई में मना अमेरिका की आजादी का 250वां साल, विदेश मंत्री ने आतंकवाद पर साझा सख्ती का किया आह्वान

अमेरिकी स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर मुंबई में आयोजित एक विशेष समारोह को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका रणनीतिक रिश्तों की मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को द्विपक्षीय संबंधों का अहम आधार बताते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के प्रति पूर्णतः शून्य सहनशीलता की नीति पर अडिग है और अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से भी इसी दृढ़ रुख की उम्मीद रखता है।
कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपनी पत्नी, अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल और अन्य प्रमुख अधिकारियों के साथ मौजूद थे। जयशंकर ने इस बात पर विशेष बल दिया कि मुंबई दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक संबंधों का एक अनूठा संगम है। यह शहर भारत की आर्थिक रीढ़ होने के साथ-साथ नवाचार, अनुसंधान, सिनेमा, कला और तकनीकी विकास का भी मुख्य संवाहक है।
संबंधों के ऐतिहासिक पहलुओं की चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि कभी बर्फ के व्यापार से शुरू हुआ यह सफर आज अत्याधुनिक वैश्विक व्यापार और नवाचार के शिखर पर पहुंच चुका है। शिकागो में स्वामी विवेकानंद के व्याख्यान से लेकर मुंबई की जैज संस्कृति और बहुराष्ट्रीय अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी तक, दोनों देशों के संबंध दशकों पुराने हैं। उन्होंने याद किया कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन को अमेरिकी नागरिकों का नैतिक समर्थन प्राप्त था। स्वतंत्रता के बाद भारत के विकास—विशेषकर शिक्षा, कृषि, खाद्यान्न और ढांचागत परियोजनाओं—में अमेरिकी सहयोग रहा, जबकि भारतीय पेशेवरों की दक्षता ने अमेरिका के आधुनिक तकनीकी परिदृश्य को संवारने में बड़ी भूमिका निभाई।
रणनीतिक सहयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि समकालीन दौर में भारत-अमेरिका भागीदारी का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। क्वाड मंच के अतिरिक्त मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज जैसी रूपरेखाएं इसी तालमेल का परिणाम हैं। नागरिक विमानन, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में निरंतर हो रही प्रगति दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंधों का प्रमाण है। मौजूदा वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं, लेकिन आपसी सहयोग, व्यापार और नई तकनीकों के समन्वय से दोनों देश इन चुनौतियों को साझा अवसरों में बदल सकते हैं।
मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस कायराना हमले में छह अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे। ताज पैलेस स्थित 26/11 स्मृति स्थल पर शहीदों को नमन करने के लिए उन्होंने मार्को रुबियो के प्रति सम्मान प्रकट किया। साथ ही, तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण की अमेरिकी प्रशासनिक कार्रवाई का स्वागत करते हुए जयशंकर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मरक्षा के मामले में भारत का रुख पूरी तरह साफ है और आतंकवाद से निपटने में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
भावी रणनीतियों का खाका खींचते हुए जयशंकर ने कहा कि स्वतंत्र, सुरक्षित और स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों की प्राथमिकता में शामिल है, जिसे सतत बातचीत और आपसी प्राथमिकताओं के आधार पर हासिल किया जा सकता है। अंत में, उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका को उसकी स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं और दोनों देशों की रणनीतिक मैत्री को आगे बढ़ाने का विश्वास जताया।



