एशियन गेम्स 2026: भारत की अंजानाबेन ने 400 मीटर में जीता स्वर्ण, जयंती को रजत और तेजलबेन को पदक

एशियन गेम्स 2026 में गुरुवार को भारतीय महिला एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रैक स्पर्धाओं में तीन पदक अपने नाम किए। महिलाओं की 400 मीटर टी47 रेस में अंजानाबेन बंबडिया ने पहले स्थान के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि हमवतन जयंती नेहरा दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत जीतने में सफल रहीं। इसी दिन महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में तेजलबेन दामोर ने भी उत्कृष्ट दौड़ लगाते हुए देश की झोली में पदक डाला।

नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित 400 मीटर टी47 स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में अंजानाबेन ने 59.97 सेकंड का समय दर्ज किया, जिससे उन्हें 848 रजा प्वाइंट्स मिले और वे शीर्ष पर रहीं। भारत की ही जयंती नेहरा ने उन्हें कड़ी टक्कर दी और एक सेकंड से भी कम अंतर से पीछे रहते हुए 1:00.65 सेकंड (815 रजा प्वाइंट्स) में रेस पूरी कर दूसरा स्थान सुरक्षित किया। इस दौड़ में थाईलैंड की धाविका ससीरावन इनथाचोट 1:02.58 सेकंड (714 रजा प्वाइंट्स) के साथ तीसरे क्रम पर रहीं, जबकि नेपाल की प्रभा आंगदेम्बे 1:15.81 सेकंड (89 रजा प्वाइंट्स) के समय के साथ चौथे स्थान पर रहीं।

अंतिम पलों में अंजानाबेन एशियन पैरा गेम्स के 58.39 सेकंड के पुराने कीर्तिमान के बेहद करीब आ गई थीं। यह रिकॉर्ड चीन की शीर्ष एथलीट ली लू ने 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में स्थापित किया था। उधर, महिलाओं की 400 मीटर टी12 श्रेणी के मुकाबले में तेजलबेन दामोर ने 57.60 सेकंड की गति से दौड़ पूरी की। इस रेस का स्वर्ण पदक ईरान की हजार सफारजादेह (56.43 सेकंड) ने जीता, जबकि चीन की शेन याकिन ने अपने गाइड हे युचोंग के साथ 58.04 सेकंड का समय निकालते हुए कांस्य पदक हासिल किया।

स्वर्ण पदक विजेता अंजानाबेन गुजरात की मूल निवासी हैं, जिनका जन्म वर्ष 2001 में हुआ था। जन्मजात रूप से उनका एक हाथ सामान्य आकार से छोटा है। देश की सबसे तेजी से आगे बढ़ती पैरा-धाविकाओं में शुमार अंजानाबेन ने 2025 में आयोजित ‘खेलो इंडिया पैरा गेम्स’ का खिताब जीता था। इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष नई दिल्ली में संपन्न हुई ‘वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025’ में उन्होंने 1:00.04 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया था।

रजत पदक हासिल करने वाली जयंती ओडिशा से संबंध रखती हैं और उनका जन्म 1999 में हुआ था। एक वर्ष की अल्पायु में वह दुर्घटनावश मिट्टी के जलते चूल्हे में गिर गई थीं, जिससे उन्हें गंभीर रूप से सेकंड-डिग्री बर्न का सामना करना पड़ा। इस दुर्घटना से उनकी बाईं कोहनी और हाथ में हमेशा के लिए जकड़न आ गई। उनके विद्यालय के खेल प्रशिक्षक विष्णु प्रसाद मिश्रा ने उनकी छिपी क्षमता को पहचाना तथा साखीगोपाल स्थित अपने ‘गुरुकुल एथलेटिक ट्रेनिंग सेंटर’ में उन्हें नि:शुल्क एथलेटिक्स प्रशिक्षण प्रदान किया।

जयंती इससे पूर्व भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ा चुकी हैं। 2018 के एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने 400 मीटर (टी47) स्पर्धा 59.71 सेकंड में पूरी कर पदक जीता था, साथ ही 200 मीटर (टी47) स्पर्धा में 27.45 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया था। वर्ष 2017 में स्विट्जरलैंड के नॉटविल शहर में संपन्न ‘वर्ल्ड जूनियर पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप’ में उन्होंने 400 मीटर दौड़ जीतकर ‘वर्ल्ड यूथ चैंपियन’ बनने का गौरव प्राप्त किया था।

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