कीमती धातुओं में लगातार पांचवें दिन नरमी: सोना 1.42 लाख और चांदी 1.95 लाख रुपये से नीचे आई

घरेलू सर्राफा बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में सोने और चांदी के भाव में कमजोरी दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद 24 कैरेट सोना 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 1.95 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने में 1,064 रुपये की कमी दर्ज की गई, जिससे इसका भाव 1,42,694 रुपये से गिरकर 1,41,630 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में यही सोना 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, जो पूरे सप्ताह के दौरान करीब 2.5 प्रतिशत की कुल गिरावट को दर्शाता है।
अन्य श्रेणियों के आभूषण निर्माण वाले सोने में भी समान रूप से नरमी देखी गई। 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,708 रुपये से घटकर 1,29,733 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। वहीं 18 कैरेट सोना भी 1,07,021 रुपये से फिसलकर 1,06,223 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
सोने के साथ-साथ चांदी में भी भारी बिकवाली दर्ज की गई। चांदी की हाजिर कीमत में 5,362 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट आई, जिसके बाद इसका भाव 1,99,777 रुपये से घटकर 1,94,415 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
हाजिर बाजार के रुख के अनुरूप वायदा बाजार (एमसीएक्स) में भी दबाव स्पष्ट दिखा। 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाला सोने का अनुबंध 500 रुपये यानी 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,809 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इसी तारीख का चांदी वायदा अनुबंध 3,993 रुपये यानी 2 प्रतिशत फिसलकर 1,95,606 रुपये प्रति किलोग्राम पर दर्ज किया गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। सप्ताह के दौरान आई 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद यह 1,42,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है। वैश्विक बाजार में, अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं के बीच कॉमेक्स पर सोना टूटकर 4,000 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ गया है।
विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और बॉन्ड यील्ड में मजबूती से बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति होने के नाते सोने की होल्डिंग लागत बढ़ रही है, जिससे इस पर चौतरफा दबाव है। जानकारों के मुताबिक, आगामी सप्ताह में आने वाला अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नीतिगत निर्णय बाजार की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। ब्याज दरों पर फेड का अंतिम रुख ही भविष्य में सोने की चाल निर्धारित करेगा।

