सीआरपीएफ का 47 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराया: एक वर्ष में कोई ऑपरेशनल क्षति नहीं, पीएम मोदी और डीजी ने जवानों को सराहा

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अभियानों के दौरान पिछले एक साल में किसी भी कर्मी के हताहत न होने का उल्लेखनीय कीर्तिमान 47 साल बाद दोबारा हासिल किया है। देश के प्रमुख अर्धसैनिक बल की इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बल के कर्मियों के योगदान को रेखांकित करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बल के इस शून्य हताहत के आंकड़े को अत्यंत अर्थपूर्ण बताया। उन्होंने अभियानों के दौरान पिछले बारह महीनों में किसी भी जवान की जान न जाने के इस विशिष्ट रिकॉर्ड की सराहना की।
सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह ने इस सामूहिक उपलब्धि का श्रेय पूरे बल को देते हुए जवानों को बधाई दी। उन्होंने ‘एक्स’ पर उल्लेख किया कि लगातार 12 महीनों तक अभियानों में कोई मृत्यु न होना ऐतिहासिक घटनाक्रम है। बल में आखिरी ऑपरेशनल क्षति 30 अक्टूबर 2025 को दर्ज हुई थी, और ऐसा दौर इससे पहले जनवरी 1979 में पूरा हुआ था।
दूसरी तरफ, यह ऐतिहासिक उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है जब बल कार्मिकों के बीच आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं की एक संवेदनशील चुनौती से रूबरू है। यद्यपि नियमों के तहत इन दुखद मामलों को ऑपरेशनल मौतों में वर्गीकृत नहीं किया जाता।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर संज्ञान लिया था, जिसमें कहा गया था कि जनवरी से मई 2026 के दरम्यान पांच महीनों से कम समय में 19 जवानों ने आत्महत्या की। इसी रिपोर्ट में उल्लेख था कि वर्ष 2025 में 59 कर्मियों की आत्महत्या के चलते मृत्यु हुई, जो विगत पांच वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा था।
मानवाधिकार आयोग ने अगस्त में टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह परिस्थिति जवानों के मूल जीवन के अधिकार से जुड़े गंभीर विषय उठाती है। परिणामस्वरूप, आयोग ने गृह मंत्रालय के गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक से स्पष्टीकरण मांगते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।
11 अगस्त के प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार, बीते पांच वर्षों के दौरान कुल 281 जवानों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया, जिनमें से लगभग 216 कर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। दर्ज आंकड़ों के तहत 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 आत्महत्या के मामले सामने आए।



