एशियन चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल: भारत ने जापान को 4-1 से किया परास्त, छठी बार बनी चैंपियन

ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में गुरुवार को आयोजित पुरुष एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में भारत ने जापान को 4-1 से मात दी। पूरे प्रतियोगिता सत्र में अजेय रहते हुए भारतीय टीम ने यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस विजय के साथ ही भारत ने खिताबी हैट्रिक पूरी करने के साथ रिकॉर्ड छठी बार यह ट्रॉफी उठाई। इससे पूर्व भारत 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में भी चैंपियन रह चुका है।
मुकाबले की शुरुआत में मेजबान भारत को उस समय झटका लगा, जब तीसरे मिनट में ही जापानी खिलाड़ी काजुमासा मात्सुमोतो ने बेहतरीन ‘टोमाहॉक’ प्रहार से फील्ड गोल दागकर स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को स्तब्ध कर दिया। एक गोल से पिछड़ने के बाद भारत को 20वें मिनट में जापानी आक्रमण का सामना करना पड़ा, जब विरोधी टीम ने लगातार दो पेनाल्टी कॉर्नर अर्जित किए। हालांकि, भारतीय रक्षकों ने जापानी कप्तान राइकी फुजीशिमा के मंसूबों पर पानी फेर दिया। पहले हाफ में एक गोल से पिछड़ने के बावजूद जरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय रक्षापंक्ति अडिग रही।
दूसरे हाफ में खेल का रुख पूरी तरह बदल गया। भारत ने 33वें मिनट में मिले अपने पहले पेनाल्टी कॉर्नर पर कप्तान हरमनप्रीत सिंह के जरिए प्रयास किया, जिसे विपक्षी गोलकीपर किशो कुरोदा ने बचा लिया। इसके बाद 39वें मिनट में जापानी खिलाड़ी शोता यामादा का पेनाल्टी कॉर्नर पर किया गया वार भी खाली गया।
मैच के 42वें मिनट में भारत को लगातार दो पेनाल्टी कॉर्नर हासिल हुए, जिसके बाद आदित्य अर्जुन लालागे के पास पर शिलानंद लाकड़ा ने रिबाउंड गेंद को गोल पोस्ट में डालकर मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया। बराबरी हासिल करने के बाद भारत का मनोबल बढ़ा और 48वें मिनट में हार्दिक के शानदार मूव पर दिलप्रीत सिंह ने शानदार रिवर्स हिट लगाकर भारत को 2-1 की अहम बढ़त दिला दी।
मुकाबले के अंतिम चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामकता बरकरार रखी। 53वें मिनट में जुगराज सिंह ने मिले पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोर 3-1 किया, वहीं 54वें मिनट में विवेक सागर प्रसाद ने शूटिंग सर्कल के ऊपरी हिस्से से तेज प्रहार करते हुए भारत का चौथा गोल दागा। अंतिम सीटी बजने से कुछ क्षण पहले जापान को मैच का चौथा पेनाल्टी कॉर्नर जरूर मिला, लेकिन कप्तान फुजीशिमा की चूक के साथ ही भारत ने मुकाबला और खिताब अपने नाम कर लिया।



