राज्यों के विकास और पूंजीगत व्यय को रफ्तार: केंद्र ने तय तारीख से पहले भेजा 1.09 लाख करोड़ का कर हिस्सा

गुरुवार को केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन की आवश्यकताओं को देखते हुए विभिन्न राज्य सरकारों को केंद्रीय करों में से 1,09,019 करोड़ रुपये की नियमित मासिक किस्त समय से पहले ही जारी कर दी। नियमानुसार यह राशि 10 नवंबर को हस्तांतरित होनी थी, लेकिन त्योहारों के मद्देनजर इसे पहले ही आवंटित कर दिया गया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस त्वरित आवंटन का प्राथमिक लक्ष्य राज्यों की नकदी स्थिति को सुदृढ़ करना है। सरकार चाहती है कि त्योहारी माहौल में राज्य अपने पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे के विकास और जनहित की कल्याणकारी योजनाओं को बिना किसी आर्थिक अड़चन के तेजी से आगे बढ़ा सकें।
इस कर हस्तांतरण में उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक 19,208 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त बिहार को 10,845 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अन्य प्रमुख राज्यों में पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ रुपये तथा राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।
राज्यों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की कड़ी में केंद्र ने हाल ही में कई बड़े कदम उठाए हैं। पिछले सप्ताह ही राज्यों को सामान्य मासिक किस्त से इतर 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी गई थी। इसी प्रकार का एक अतिरिक्त हस्तांतरण अगस्त के महीने में भी 1,09,019 करोड़ रुपये के रूप में किया गया था, ताकि क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं में निरंतरता बनी रहे।
दूसरी ओर, चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 7.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राशि पूरे वित्त वर्ष के लिए तय बजटीय लक्ष्य के 42.1 प्रतिशत के बराबर है। सरकार ने समूचे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 16.96 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान बांधा है।
राजस्व के मोर्चे पर अप्रैल से सितंबर के दौरान कुल 17.57 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए, जो वार्षिक बजट लक्ष्य का 49.7 प्रतिशत है। इस कुल राजस्व में शुद्ध प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों का योगदान 12.76 लाख करोड़ रुपये रहा, वहीं शेष 4.81 लाख करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व स्रोतों से प्राप्त हुए।



