मुख्यमंत्री ने खेली फूलों की होली

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार भगवान श्रीराम के प्रदेश में विभिन्न आगमन स्थलों के संरक्षण और उन्नयन का कार्य कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण लीला-स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने के लिये श्रीकृष्ण पाथेय योजना को क्रियान्वित करने का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीला धाम में भी श्रृद्धालुओं को आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिये एक करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अशोकनगर के करीला धाम में माँ जानकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने रंगपंचमी के पावन पर्व पर श्रृद्धालुओं के साथ फूलों की होली भी खेली।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि करीला धाम में श्रृद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा। मेले की व्यवस्थाओं को और अधिक पुख्ता किया जायेगा, यह प्रयास किया जायेगा कि करीला धाम मेला राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाये। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में करीला धाम में आने जाने वाले मार्गों पर श्रृद्धालुओं के लिए छाया की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संबंध चंदेरी से होने के कारण यहां की गढ़ी को भव्य बनाया जायेगा।

“भगवान श्रीराम का जीवन संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणास्रोत”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीराम, माता जानकी और रघुकुल के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित किये गये आदर्श संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि करीला धाम की दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा ऐसी है कि एक बार जो यहां आता है, वह स्वयं को बार-बार आने से रोक नहीं पाता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राई नृत्य का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान श्रीराम के घर में लव-कुश का जन्म हुआ होगा, तब इसे ‘रघुराई नृत्य’ कहा जाता रहा होगा।

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