वन्य जीव सप्ताह-2025 का शुभारंभ: मुख्यमंत्री ने कहा – वन्य जीव प्रकृति की ‘अलौकिक धरोहर’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में राज्य स्तरीय वन्य जीव सप्ताह-2025 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने वन्य जीवों को हमारी “प्राकृतिक पूंजी” और “जंगल और पर्यावरण की रोशनी” बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बल दिया कि “मानव और वन्य जीवों का सहअस्तित्व ही प्रकृति के संतुलन का वास्तविक प्रतीक है।” उन्होंने ‘जियो और जीने दो’ की भावना के साथ वन्य जीव संरक्षण के निरंतर प्रयासों की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने वन्य जीवों को “लौकिक जगत की अलौकिक धरोहर” बताते हुए कहा कि उनका संरक्षण केवल पारिस्थितिक आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है।
पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास की पहलें
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पर्यटक वाहन सफारी और वन विहार के 40 से अधिक पर्यटक ई-वाहनों (ई-व्हीकल्स) का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह ईको टूरिज्म डेवलपमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे पर्यटक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सफारी का आनंद ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने ‘भारत के वन्यजीव: उनका रहवास एवं आपसी संचार’ विषय पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने वन और वन्य जीवों के प्रति जागरूकता फैलाने में योगदान देने वाले 9 शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों और 1 वन्य प्राणी रेस्क्यू दल को वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया।
डॉ. यादव ने प्रदेश के टाइगर रिजर्व्स में पर्यटन से प्राप्त आय के लाभांश के रूप में 5 ईको विकास समितियों को प्रतीकात्मक पुरस्कार राशि भी प्रदान की, और बताया कि कुल 636 ईको विकास समितियों को ₹18 करोड़ 74 लाख से अधिक की राशि दी जा रही है। उन्होंने वन्यजीव-मानव सहअस्तित्व पर एक पुस्तक और गिद्ध संरक्षण पर वन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन भी किया।
मध्य प्रदेश वन और वन्य जीवों में अव्वल
मुख्यमंत्री ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश वन और वन्य जीवों के मामले में देश में अव्वल है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, 25 वन्यजीव अभयारण्य, 9 टाइगर रिजर्व और 1 कंजर्वेशन रिजर्व है, और 30 प्रतिशत से अधिक भूमि वनों से आच्छादित है।
उन्होंने जोर दिया कि चीता, बाघ, घड़ियाल, गिद्ध और अब कोबरा भी मध्य प्रदेश की पहचान हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन और जबलपुर में दो नए चिड़ियाघर (जू) तेजी से बनाए जा रहे हैं, और सरकार का लक्ष्य है कि सभी राष्ट्रीय उद्यानों के पास जू एंड रेस्क्यू सेंटर विकसित किए जाएं ताकि घायल जानवरों को तुरंत इलाज मिल सके। उन्होंने नर्मदा और सहायक तवा नदी में जल्द ही मगरमच्छ छोड़े जाने की भी घोषणा की।
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में डीजल वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का निर्णय पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नवाचार है।


