उच्च शिक्षा में सुधार की तैयारी: मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ की समीक्षा

भोपाल स्थित मंत्रालय में “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025” की रूपरेखा और इसके दूरगामी परिणामों का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अगुवाई में हुई इस बैठक में विधेयक के मसौदे से जुड़े हर छोटे-बड़े कानूनी बिंदुओं पर बारीकी से विचार किया गया, ताकि भविष्य की शैक्षणिक नीतियों को सुदृढ़ किया जा सके।
बैठक का एजेंडा मुख्य रूप से उच्च शिक्षण संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने पर केंद्रित रहा। इसमें विश्वविद्यालयों के सुचारू संचालन, शैक्षणिक स्तर की निगरानी, सर्टिफिकेशन की व्यवस्थाओं में सुधार और रेगुलेटरी नियमों को सरल बनाने जैसे अहम बिंदुओं पर मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और खोज की संस्कृति को कैसे और अधिक गतिशील बनाया जाए।
विधेयक के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री श्री परमार ने कहा कि वर्तमान सरकार देश की नई शिक्षा नीति के सपनों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर काम कर रही है। यह नया कानून हमारी पूरी उच्च शिक्षा प्रणाली को ज्यादा सुलभ, पारदर्शी और उत्कृष्ट बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने दोहराया कि राज्य के विद्यार्थियों को उच्च दर्जे की शिक्षा और नए अनुसंधान के लिए हर संभव संसाधन व अवसर प्रदान करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अकादमिक और प्रशासनिक तालमेल के लिहाज से आयोजित की गई इस बैठक में शासन के शीर्ष नीति-निर्माता भी मौजूद थे। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन, मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक श्री अशोक कड़ेल के साथ-साथ प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के प्रमुख डॉ. रविंद्र कान्हेरे ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। साथ ही, अलग-अलग विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, विषय विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने भी इस चर्चा में अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।



