मध्यप्रदेश में सब्जी उत्पादन में भारी उछाल: किसान कल्याण वर्ष में उद्यानिकी विस्तार के लिए बनी व्यापक कार्ययोजना

मध्यप्रदेश ने मौजूदा समय में देश के भीतर कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को पूरे प्रदेश में “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य ध्येय कृषकों की आमदनी को बढ़ाना, खेती में विविधता लाना और इसे पहले से कहीं अधिक मुनाफे का सौदा बनाना है। इस नीति के सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं, जहां बीते 4 वर्षों के भीतर राज्य में सब्जी उत्पादन में करीब 21.58 लाख मीट्रिक टन की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस उल्लेखनीय प्रगति के साथ ही मध्यप्रदेश अब देश में सर्वाधिक सब्जी उगाने वाले राज्यों की सूची में तीसरे पायदान पर पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि खेती-किसानी को केवल पारंपरिक फसलों के दायरे तक सीमित रखकर किसानों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधारी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कृषकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को भी समान रूप से तवज्जो देना बेहद जरूरी है। इसी विजन को धरातल पर उतारने के लिए उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” के मूलमंत्र पर काम करते हुए सब्जियों के क्षेत्र विस्तार की एक वृहद कार्ययोजना तैयार की गई है।
राज्य की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी, सिंचाई के साधनों में हुआ विकास और किसानों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों के चलते प्रदेश में सब्जियों का उत्पादन लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में जहां राज्य का कुल सब्जी उत्पादन 236.41 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 257.99 लाख मीट्रिक टन तक जा पहुंचा। यह वृद्धि राज्य के कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र के सुदृढ़ ढांचे को प्रमाणित करती है। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कुल 2177 लाख मीट्रिक टन सब्जी उत्पादन में अकेले मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी तकरीबन 259 लाख मीट्रिक टन है, जो देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में राज्य की बड़ी भूमिका को दर्शाती है।
मध्यप्रदेश के किसान मौजूदा समय में प्याज, आलू, टमाटर, बैंगन, फूल-गोभी, पत्ता-गोभी, हरी मटर, भिंडी, पालक, लौकी, अरबी, करेला, ककड़ी, मूली, तोरी, गाजर, शकरकंद, शिमला मिर्च और परवल जैसी विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इनमें भी प्याज की खेती का रकबा सबसे अधिक है। वर्ष 2022-23 में प्याज की खेती का क्षेत्र 2.17 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.30 लाख हेक्टेयर हो गया है। चूंकि छोटी जोत वाले किसानों के लिए कम जमीन में अधिक लाभ कमाने का सब्जी उत्पादन एक बेहतरीन जरिया है, इसीलिए ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत सब्जी क्षेत्र के विस्तार को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
इस सिलसिले में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने प्रदेश के भीतर 54 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सब्जियों का विस्तार करने का लक्ष्य तय किया है। इस कार्ययोजना के तहत 13 हजार 300 हेक्टेयर में आलू, 9 हजार 800 हेक्टेयर में टमाटर, 16 हजार 500 हेक्टेयर में प्याज, 3 हजार 500 हेक्टेयर में मटर, 3 हजार 500 हेक्टेयर में फूल-गोभी व पत्ता-गोभी, 1 हजार 200 हेक्टेयर में उच्च मूल्य वाली विशेष सब्जियां तथा 6 हजार 200 हेक्टेयर क्षेत्र में कद्दूवर्गीय सब्जियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पूरी योजना के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीकी मार्गदर्शन, उच्च गुणवत्ता के पौधे, आधुनिक कृषि प्रणालियां और बेहतर बाजार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह के मार्गदर्शन में विभाग लगातार कृषकों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक मुनाफे वाली व्यावसायिक सब्जियों की खेती की तरफ मोड़ने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों, संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन), सूक्ष्म सिंचाई और उन्नत बीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। सब्जी उत्पादन न केवल किसानों को सालभर नियमित आय देकर आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में उत्पादन, परिवहन, भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) और विपणन के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इन दूरदर्शी नीतियों के चलते मध्यप्रदेश आने वाले समय में देश का शीर्ष उद्यानिकी राज्य बनने की राह पर अग्रसर है।



