‘विकसित भारत’ के लिए 8% ग्रोथ रेट ज़रूरी, ग्लोबल चुनौतियों से निपटने में सक्षम है देश: वित्त मंत्री

चौथे कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (KEC) के उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लक्ष्य और क्षमता पर बात की।
KEC की इस साल की थीम ‘उथल-पुथल भरे समय में समृद्धि की तलाश’ है। यह कॉन्क्लेव अक्टूबर तक चलेगा और इसमें से अधिक देशों के विदेशी प्रतिनिधियों सहित कई विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। इसका समापन विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।
वित्त मंत्री के मुख्य वक्तव्य:
- ग्रोथ का लक्ष्य: भारत का टारगेट 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, जिसके लिए 8% की ग्रोथ रेट आवश्यक है।
- आत्मनिर्भरता: आत्मनिर्भरता को मजबूत करना महत्वपूर्ण है, पर इसका मतलब बंद अर्थव्यवस्था (क्लोज्ड इकोनॉमी) नहीं है।
- सीमित प्रभाव: मौजूदा वैश्विक अस्थिरता (जैसे कम निवेश और अस्थिर एनर्जी प्राइस) का भारत की GDP वृद्धि पर सीमित असर होगा, क्योंकि हमारी आर्थिक वृद्धि की रीढ़ घरेलू कारक हैं।
- वैश्विक व्यवस्था में बदलाव: उन्होंने वैश्विक अस्थिरता को संरचनात्मक बदलाव माना। वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है, क्योंकि वे विश्व समुदाय का भरोसा खो रही हैं।
RBI का अनुमान: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी MPC बैठक में देश की GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है।



