लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ नियुक्त किए गए देश के अगले थल सेनाध्यक्ष, अगस्त 2028 तक रहेगा कार्यकाल

भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन के तहत केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थल सेनाध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय लिया है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ, जो वर्तमान में सेना के उप-प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जून के अंत में मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद शीर्ष पद की कमान संभालेंगे। आर्म्ड कॉर्प्स की पृष्ठभूमि से आने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ पिछले करीब तीन दशकों में इस कॉम्बैट ब्रांच से थल सेना प्रमुख बनने वाले पहले अधिकारी हैं; इनसे पहले 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी इस पद पर पहुंचे थे। चार दशकों के अपने लंबे सैन्य सफर में उन्होंने रणनीतिक, परिचालन और संगठनात्मक स्तर पर देश की सुरक्षा प्रणाली में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ का कार्यकाल अगस्त 2028 तक चलने की उम्मीद है। उनकी नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है जब सेना के सामने चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और थिएटर कमांड ढांचे को अमलीजामा पहनाने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से स्नातक करने के बाद वे दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर का हिस्सा बने थे। उन्होंने अपने पूरे करियर में सेना की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और सेना के दीर्घकालिक आधुनिकीकरण के पहलों में अग्रिम भूमिका निभाई है।

विभिन्न मोर्चों पर काम करते हुए उन्होंने सेना के हर स्तर पर सैन्य टुकड़ियों का सफल संचालन किया है। उन्होंने मरुस्थलीय इलाकों में बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी सीमा पर आर्म्ड ब्रिगेड और आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स का नेतृत्व किया है। पदोन्नति पाकर लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्हें भारतीय सेना के शक्तिशाली स्ट्राइक फॉर्मेशन ‘सुदर्शन चक्र कॉर्प्स’ के कमांडर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके बाद वे दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के पद पर रहे, जहां उनके जिम्मे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधियों, राजकीय प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर के प्रमुख कार्यक्रमों के आयोजन के समन्वय का जिम्मा था। आर्मी कमांडर के पद पर पहुंचने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों की कमान संभाली। बहुत कम अधिकारियों को दो अलग-अलग ऑपरेशनल सैन्य कमानों का नेतृत्व करने का अवसर मिलता है, जिसमें वे शामिल रहे। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने ढाई वर्षों से अधिक समय तक देश के संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों की रणनीतिक निगरानी की।

मैदानी कमान के अलावा लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने सेना मुख्यालय में रहते हुए रणनीतिक योजना और क्षमता संवर्धन की दिशा में काम किया, जिससे सेना के फोर्स मैनेजमेंट को मजबूती मिली। वे मुख्यालय के रणनीतिक योजना प्रभाग से जुड़े रहे, जहां उन्होंने सेना के भविष्य के बदलावों, आधुनिकीकरण के खाके और संगठनात्मक ढांचे में सुधार की नीतियों को तैयार करने में सक्रिय सहभागिता की। बदलती वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों और आधुनिक तकनीकों को सेना की जरूरतों के साथ जोड़ने में उनका काम बेहद प्रभावी रहा है।

अकादमिक और रणनीतिक मोर्चे पर बेहद कुशल माने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। वे ‘हायर कमांड कोर्स’ और ‘नेशनल डिफेंस कॉलेज’ के छात्र रहे हैं, साथ ही उन्होंने पेरिस से ‘कमांड एंड स्टाफ कोर्स’ भी किया है। आधुनिक रक्षा मामलों की यह गहरी समझ उन्हें वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को बेहतर ढंग से समझने की क्षमता देती है। वर्तमान समय की जटिल सुरक्षा चुनौतियों और आंतरिक सुधारों के बीच वे भारतीय सेना का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। देश की रक्षा में उनकी विशिष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें ‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’ सहित अन्य महत्वपूर्ण सैन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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