इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक संपन्न, ‘इंदौर घोषणा-पत्र’ के जरिए वैश्विक खाद्य सुरक्षा का नया ढांचा तैयार

भारत के इंदौर शहर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय और अधिकारी स्तरीय महत्वपूर्ण बैठकों का समापन हो गया है, जिसमें सर्वसम्मति से ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ को अंगीकार किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में यह स्वीकृत घोषणा-पत्र खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, टिकाऊ खेती, डिजिटल कृषि और पारदर्शी कृषि व्यापार के क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग की एक नई नींव रखने का काम करेगा।

इस उच्च स्तरीय सम्मेलन की सफलता का विवरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दोनों स्तरों की बैठकों में सदस्य व सहयोगी देशों के करीब 60 विदेशी डेलिगेट्स सहित कुल 100 के लगभग प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। ब्रिक्स की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ये देश सामूहिक रूप से विश्व की आधी आबादी को कवर करते हैं। इसके अलावा, दुनिया की कुल कृषि भूमि का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों के पास है और वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन में भी इनका योगदान 42 प्रतिशत है। इसी विशाल क्षमता के कारण इन देशों का कोई भी सामूहिक निर्णय वैश्विक कृषि परिदृश्य को बदलने की ताकत रखता है।

बैठक की कार्यसूची में मुख्य रूप से चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इनमें खाद्य और पोषण की सुरक्षा, कृषि उत्पादों का पारस्परिक व्यापार और सहयोग, पर्यावरण परिवर्तन के दौर में सतत व पुनर्योजी (रीजेनेरेटिव) कृषि पद्धतियां, और इस क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक व नवाचारों का समावेश शामिल हैं। इन समस्त चर्चाओं के केंद्र बिंदु के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लघु और सीमांत किसानों का उत्थान ही हमारी प्राथमिक नीति रही है।

शिवराज सिंह चौहान ने बल देकर कहा कि सर्वसम्मति से पारित ‘इंदौर घोषणा-पत्र’ पूरी तरह से किसान-केंद्रित है। यह निवेश, पोषण, नवाचार, जलवायु-सहनीय खेती और खाद्य सुरक्षा के प्रति सदस्य देशों के साझा संकल्पों को रेखांकित करता है। उनके अनुसार, यह सिर्फ कागजी नीति नहीं बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक जिम्मेदारी और मजबूत इच्छाशक्ति का परिचायक है।

कृषि क्षेत्र में तकनीकी व व्यावहारिक सुधारों के लिए सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण ढांचागत नेटवर्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया है:

  • एग्रो-इकोलॉजी उत्कृष्टता केंद्र: प्राकृतिक और जैविक खेती से जुड़े शोध तथा प्रशिक्षण को साझा करने के लिए ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रो-इकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर’ बनाया जाएगा। भारत का मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान इस नेटवर्क में अपनी सेवाएं देगा।

  • डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भू-स्थानिक समाधानों को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर’ काम करेगा, जिसका भारत में नेतृत्व आईआईटी दिल्ली द्वारा किया जाएगा।

  • किसानों के बीज अधिकारों की सुरक्षा: देशी और पारंपरिक बीजों की विविधता व किसानों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ‘ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स Rights इन सीड सिस्टम्स’ का गठन किया जाएगा। चौहान ने कहा कि जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा के लिए आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार के बीजों का संरक्षण आवश्यक है।

  • सूचना व इनपुट का आदान-प्रदान: सदस्य देशों के मध्य कृषि आदानों, आनुवंशिक संसाधनों और तकनीकी आंकड़ों के सुचारू प्रवाह के लिए ‘ब्रिक्स एग्रीएन’ (Agro Inputs, Genetic Resources and Information Network) की शुरुआत की जाएगी।

अनुसंधान के लाभों को सीधे जमीन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म’ का विस्तार करते हुए उसे ‘नॉलेज टू एक्शन हब’ का रूप दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि यह पहल ‘लैब टू लैंड’ (प्रयोगशाला से खेत तक) के दृष्टिकोण को साकार करेगी, जिससे वैज्ञानिक शोधों का लाभ सीधे किसानों को उनके खेतों में मिल सकेगा।

वैश्विक व्यापारिक नीतियों पर चर्चा करते हुए बैठक में एक न्यायसंगत, पारदर्शी और समावेशी बहुपक्षीय कृषि व्यापार प्रणाली की वकालत की गई, जिसके तहत ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ जैसी संभावनाओं पर भी विचार किया गया। आपसी बातचीत में व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और कृषि उत्पादों के आदान-प्रदान को सरल बनाने पर सहमति बनी। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में रीजेनेरेटिव खेती को आवश्यक बताते हुए चौहान ने कहा कि कार्बन क्रेडिट प्रणाली का सही अनुपालन कर किसान इससे अतिरिक्त लाभ अर्जित कर सकते हैं। इसके साथ ही भोजन की बर्बादी (फूड लॉस) को न्यूनतम करने की रणनीतियों पर भी बात हुई।

घरेलू मोर्चे पर किसानों को राहत देने की बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर खादों की कीमतें बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार भारतीय किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक देती रहेगी। वर्तमान में यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर पर दी जा रही है, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी हुई कीमतों का पूरा भार सरकार खुद वहन कर रही है। इसके अतिरिक्त, जो छोटे किसान महंगे उपकरण नहीं खरीद सकते, उन्हें कस्टम हायरिंग सेंटर्स के जरिए ड्रोन और आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

खेती को भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए कृषि क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना गया। भारत में बढ़ते एग्री-स्टार्टअप्स और तकनीकी सेवाओं की वजह से युवा वर्ग इस ओर आकर्षित हो रहा है, जिसे ब्रिक्स देशों ने भी सराहा। अंत में, इंदौर की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी अंतरराष्ट्रीय डेलिगेट्स ने मेघदूत गार्डन में पौधे लगाकर ‘ब्रिक्स वाटिका’ तैयार की। उन्होंने इस पूरे आयोजन को सामूहिक प्रयासों यानी ‘टीम इंडिया’ और ‘होल ऑफ गवर्नमेंट एप्रोच’ की एक आदर्श सफलता बताया।

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