सुरक्षित भविष्य का संकल्प: आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत तैयार कर रहा है ‘एंटी-टेरर ग्रिड’

‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ के दौरान केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की चुनौतियों से आगाह किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है, हमारी सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ेंगी।
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अभेद सुरक्षा तंत्र: सरकार एक ऐसा तंत्र विकसित कर रही है जो न केवल सीमाओं पर बल्कि साइबर और आर्थिक मोर्चों पर भी सक्रिय रहे।
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Trial-in-Absentia: भगोड़े अपराधियों को न्याय के घेरे में लाने के लिए उनकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने की प्रक्रिया को सख्ती से आगे बढ़ाया जाएगा।
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वाटरटाइट इन्वेस्टिगेशन: पहलगाम आतंकी हमले और दिल्ली विस्फोटों की जांच को दुनिया भर के लिए एक केस स्टडी बताया गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करेगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक के साथ आतंकवाद का स्वरूप भी ‘हाइब्रिड’ हो गया है। इससे निपटने के लिए सरकार निम्नलिखित रणनीतियों पर काम कर रही है:
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ऑपरेशनल यूनिफॉर्मिटी: देश भर में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में एकरूपता लाने के लिए NIA ने एक ‘कॉमन ATS स्ट्रक्चर’ तैयार किया है। सभी राज्यों के DGPs को इसे जल्द लागू करने को कहा गया है ताकि इंटेलिजेंस शेयरिंग और जवाबी कार्रवाई अधिक सटीक हो सके।
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डेटाबेस का एकीकरण: गृह मंत्री ने कहा कि अलग-अलग काम कर रही तकनीक ‘बिना गोली की बंदूक’ के समान है। उन्होंने NIDAAN और NATGRID जैसे डेटाबेस के अनिवार्य उपयोग पर जोर दिया ताकि आतंकी घटनाओं के ‘अदृश्य लिंक’ को पकड़ा जा सके।
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संगठित अपराध पर प्रहार: विदेशों में बैठे गैंगस्टर्स और आतंकी संगठनों के गठजोड़ को तोड़ने के लिए 360 डिग्री एक्शन प्लान लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य फिरौती और धन उगाही के जरिए टेरर फंडिंग को रोकना है।



