पढ़ाई का अर्थ केवल नौकरी नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त विकास है: डॉ. मोहन यादव ने युवाओं को दी नई दृष्टि

राष्ट्रकथा शिविर में शामिल हुए हजारों विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा के वास्तविक अर्थ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केवल कागजी डिग्री या मेरिट लिस्ट में नाम आना ही उपलब्धि नहीं है, बल्कि शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों का नैतिक और संस्कारयुक्त समग्र विकास होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने मां को प्रथम गुरु बताते हुए कहा कि हमारी संस्कृति ने हमेशा विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है। डॉ. यादव ने भारतीय समाज के ‘स्व-अनुशासन’ पर एक रोचक तथ्य साझा किया। उन्होंने कहा कि 145 करोड़ की आबादी वाले भारत में मात्र 40 लाख सुरक्षाकर्मी हैं, जो यह दर्शाता है कि हमारे नागरिक स्वाभाविक रूप से अनुशासित हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति का भाव हमारे शरीर में रक्त की तरह प्रवाहित होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्वामी धर्मबंधु जी के प्रयासों की सराहना की, जो विभिन्न प्रांतों के युवाओं को राष्ट्र सेवा की ओर प्रवृत्त कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत पारंपरिक गुजराती पगड़ी पहनाकर किया गया।


