बैटरी का ‘बर्थ सर्टिफिकेट’ बनेगा BPAN: रिसाइक्लिंग और सेकंड-लाइफ मैनेजमेंट में आएगी क्रांति

भारत में लिथियम-आयन बैटरी की मांग का लगभग 80-90% हिस्सा EV सेक्टर से आता है। इसी को देखते हुए सरकार ने BPAN फ्रेमवर्क तैयार किया है।

सिस्टम कैसे काम करेगा?

  1. लाइफ साइकिल ट्रैकिंग: यह सिस्टम कच्चे माल की माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और उपयोग के चरणों पर नजर रखेगा।

  2. सेकंड लाइफ का आकलन: जब EV बैटरी की क्षमता 70-80% रह जाती है, तब वह सड़क पर चलने लायक नहीं रहती। BPAN के जरिए यह पहचानना आसान होगा कि उस बैटरी का उपयोग सोलर पावर स्टोरेज या घरेलू इन्वर्टर (सेकंड लाइफ) में किया जा सकता है या नहीं।

  3. री-रजिस्ट्रेशन: यदि किसी पुरानी बैटरी को रिसाइकिल करके दोबारा नया बनाया जाता है, तो उसे एक नया BPAN जारी किया जाएगा।

इंडस्ट्रियल बैटरियों पर असर: मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि न केवल EV, बल्कि 2 kWh से अधिक क्षमता वाली सभी इंडस्ट्रियल बैटरियों को भी इस दायरे में लाया जाए। इसके लिए AIS (ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड) कमेटी मानकों को अंतिम रूप देगी।

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