एयरोनॉटिक्स 2047: वायुसेना प्रमुख ने एलसीए तेजस की सफलता को सराहा; 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लिए स्वदेशी तकनीक पर जोर

बेंगलुरु: एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ का भव्य शुभारंभ 4 जनवरी, 2026 को हुआ। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एलसीए तेजस के गौरवशाली 25 वर्ष पूरे होने पर एडीए को बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारी बनाए रखने के लिए विमानों की डिलीवरी समय पर होना अनिवार्य है।
इस अवसर पर डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों के विकास को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
तकनीकी चर्चा के मुख्य बिंदु:
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तेजस की विरासत: तेजस के डिजाइन से लेकर स्क्वाड्रन में शामिल होने तक के सफर पर चर्चा हुई। अब तक इसके 5,600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण हो चुके हैं।
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विशिष्ट तकनीकें: एलसीए को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने वाली कार्बन कंपोजिट, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल और डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकों के विकास को रेखांकित किया गया।
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भविष्य के प्रोजेक्ट: वर्तमान में एलसीए एमके II और एलसीए नेवी के विकास पर तेजी से काम चल रहा है, जो वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे।
एलसीए कार्यक्रम की सफलता के आंकड़े:
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स्क्वाड्रन में शामिल: अब तक 38 विमान (32 लड़ाकू और 6 ट्रेनर) वायुसेना के दो स्क्वाड्रनों का हिस्सा बन चुके हैं।
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सहयोग: इस कार्यक्रम में सरकारी लैब और शैक्षणिक संस्थानों सहित 100 से अधिक डिजाइन कार्य केंद्रों ने योगदान दिया है।


