ED बनाम बंगाल सरकार: सुप्रीम कोर्ट पहुंची एजेंसी

प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि पश्चिम बंगाल में कानून के शासन का खुला अपमान किया जा रहा है। अवैध कोयला खनन घोटाले की जांच के दौरान I-PAC ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर हुई छापेमारी को बलपूर्वक रोका गया। पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसी और राज्य सरकार के बीच टकराव अब अपने चरम पर है। ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि कोयला घोटाले की जांच के दौरान टीएमसी आईटी हेड के ऑफिस में हुई रेड को राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर दबाने की कोशिश की गई।
ED की याचिका की 5 बड़ी बातें:
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सबूतों की सुरक्षा: ED ने अदालत से मांग की है कि छापेमारी के दौरान अवैध रूप से छीने गए सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को तुरंत जब्त कर सील किया जाए।
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षड्यंत्र का आरोप: एजेंसी ने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के समर्थकों को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कोर्ट में हंगामा करने के लिए बुलाया गया ताकि सुनवाई प्रभावित हो सके।
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धमकाने का प्रयास: आरोप है कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने मौके पर पहुंचकर जांच अधिकारियों को डराया, जिससे स्वतंत्र जांच संभव नहीं है।
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कानून से ऊपर कोई नहीं: ED ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यह संदेश जाना जरूरी है कि राजनीतिक पद पर बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
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गलत FIR: जांच को कमजोर करने के लिए ED अधिकारियों पर जो जवाबी केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें रद्द कर CBI के सुपुर्द किया जाए।



